History Chapter 8: Press, Culture and Nationalism | Bihar Board Class 10 Notes
अध्याय 8: प्रेस, संस्कृति एवं राष्ट्रवाद
1प्रेस (छापाखाना) का महत्व
प्रेस या छापाखाना आधुनिक समाज का एक महत्वपूर्ण आविष्कार है। इसके माध्यम से ज्ञान, समाचार और विचार तेजी से लोगों तक पहुँचते हैं। प्रेस ने शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक सुधार को बढ़ावा दिया। इसने लोगों में तर्क, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना का विकास किया।
2मुद्रण का इतिहास
प्राचीन समय में लोग गुफाओं और चट्टानों पर चित्र बनाकर अपने विचार व्यक्त करते थे। बाद में मिट्टी की टिकियों और लकड़ी के ब्लॉकों से छपाई की जाने लगी। 105 ई. में चीन में कागज का आविष्कार हुआ। 1041 ई. में पि-शेंग ने मिट्टी के मूवेबल टाइप बनाए। 13वीं शताब्दी में कोरिया में धातु के मूवेबल टाइप का उपयोग शुरू हुआ।
3यूरोप में मुद्रण और गुटेनबर्ग की क्रांति
13वीं शताब्दी में रेशम मार्ग के माध्यम से ब्लॉक प्रिंटिंग यूरोप पहुँची। प्रारंभ में ताश के पत्ते और धार्मिक चित्र छापे जाते थे। योहान्स गुटेनबर्ग ने 1440 के आसपास आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया। उन्होंने धातु के मूवेबल टाइप का उपयोग किया। 1455 में गुटेनबर्ग बाइबिल प्रकाशित हुई। इससे यूरोप में मुद्रण क्रांति आई और शिक्षा, ज्ञान तथा राष्ट्रवाद के प्रसार को नई गति मिली।
4गुटेनबर्ग की पृष्ठभूमि और प्रमुख कार्य
गुटेनबर्ग का जन्म जर्मनी के मेन्ज़ नगर में हुआ था। वे किसान-व्यापारी परिवार से थे और उन्हें धातु तथा यांत्रिकी का ज्ञान था। उन्होंने धातु के मूवेबल टाइप, तेल आधारित स्याही और हैंडप्रेस का विकास किया। उनके साझेदार फस्ट और शॉफर ने बाद में उनके प्रेस पर अधिकार कर लिया। फिर भी उनकी तकनीक पूरे यूरोप में फैल गई। विलियम कैक्सटन ने इंग्लैंड में इसे लोकप्रिय बनाया।
5भारत में प्रेस का आगमन
भारत में 16वीं शताब्दी में पुर्तगाली मिशनरियों ने पहला प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया। इससे पुस्तकों और धार्मिक साहित्य की छपाई शुरू हुई। 1579 में पहली तमिल पुस्तक छपी। धीरे-धीरे मुद्रण कला और समाचार पत्रों का विकास हुआ तथा प्रेस का उपयोग सामाजिक और राजनीतिक विचारों के प्रचार के लिए भी होने लगा।
6भारत में समाचार पत्रों का उदय
1780 में जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने बंगाल गजट प्रकाशित किया, जिसे भारत का पहला समाचार पत्र माना जाता है। 1816 में गंगाधर भट्टाचार्य ने भारतीयों द्वारा प्रकाशित बंगाल गजट निकाला। राजा राममोहन राय ने संवाद कौमुदी (1821) और मिरात-उल-अखबार (1822) के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक सुधारों का प्रचार किया।
7राष्ट्रवादी प्रेस और जनजागरण
अमृत बाजार पत्रिका, केसरी और हिंदू पैट्रियट जैसे पत्रों ने अंग्रेजों की नीतियों का विरोध किया। बाल गंगाधर तिलक ने केसरी और मराठा के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाई। महात्मा गांधी ने यंग इंडिया और हरिजन के माध्यम से असहयोग आंदोलन, सत्याग्रह और स्वदेशी का प्रचार किया। प्रताप और हिंदू पैट्रियट जैसे पत्रों ने किसानों और मजदूरों की समस्याओं को उठाया।
8सांप्रदायिक एकता और प्रेस
मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अल-हिलाल और मोहम्मद अली ने कामरेड के माध्यम से हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया। इससे राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती मिली।
9ब्रिटिश दमन और प्रेस अधिनियम
भारतीय समाचार पत्रों की बढ़ती लोकप्रियता से अंग्रेज सरकार चिंतित हुई। इसलिए उसने प्रेस की स्वतंत्रता पर कई प्रतिबंध लगाए। 1878 में लॉर्ड लिटन ने वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट लागू किया। 1908 के समाचार पत्र अधिनियम और 1910 के भारतीय प्रेस अधिनियम ने भी राष्ट्रवादी प्रेस पर नियंत्रण बढ़ाया।
10स्वतंत्रता के बाद प्रेस
स्वतंत्रता के बाद प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया। प्रेस सरकार की नीतियों की जानकारी जनता तक पहुँचाता है और भ्रष्टाचार तथा सामाजिक बुराइयों को उजागर करता है। शिक्षा, विज्ञान, खेल, साहित्य और सामाजिक जागरूकता के विकास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
11📰 महत्वपूर्ण समाचार पत्र
- योहान्स गुटेनबर्ग — आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस के आविष्कारक।
- पि-शेंग — मिट्टी के मूवेबल टाइप के आविष्कारक।
- मार्को पोलो — मुद्रण कला के प्रसार में योगदान देने वाले यात्री।
- जेम्स ऑगस्टस हिक्की — बंगाल गजट के प्रकाशक।
- गंगाधर भट्टाचार्य — भारतीयों द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र के संपादक।
- राजा राममोहन राय — संवाद कौमुदी और मिरात-उल-अखबार से सामाजिक सुधारों का प्रचार।
- बाल गंगाधर तिलक — केसरी और मराठा के माध्यम से राष्ट्रवाद का प्रचार।
- महात्मा गांधी — यंग इंडिया और हरिजन के माध्यम से राष्ट्रीय आंदोलन का प्रचार।
- मौलाना अबुल कलाम आजाद — अल-हिलाल के संपादक।
- मोहम्मद अली — कामरेड के संपादक।
- लॉर्ड लिटन — वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट लागू करने वाले वायसराय।
- विलियम कैक्सटन — इंग्लैंड में प्रिंटिंग प्रेस को लोकप्रिय बनाने वाले मुद्रक।
13⚖️ महत्वपूर्ण अधिनियम
14📅 महत्वपूर्ण वर्ष
- 105 ई. — चीन में कागज का आविष्कार।
- 594 ई. — चीन में लकड़ी के ब्लॉकों से मुद्रण।
- 1041 ई. — पि-शेंग ने मिट्टी के मूवेबल टाइप बनाए।
- 1440 ई. — गुटेनबर्ग ने आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस का आविष्कार किया।
- 1455 ई. — गुटेनबर्ग बाइबिल प्रकाशित हुई।
- 1579 ई. — भारत में पहली तमिल पुस्तक छपी।
- 1780 ई. — बंगाल गजट प्रकाशित हुआ।
- 1816 ई. — भारतीयों द्वारा प्रकाशित बंगाल गजट।
- 1821 ई. — संवाद कौमुदी का प्रकाशन।
- 1822 ई. — मिरात-उल-अखबार का प्रकाशन।
- 1878 ई. — वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट।
- 1908 ई. — समाचार पत्र अधिनियम।
- 1910 ई. — भारतीय प्रेस अधिनियम।
15🔑 महत्वपूर्ण शब्द
16📚 परीक्षा सारांश
- प्रेस ने शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्रवाद के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- गुटेनबर्ग के प्रिंटिंग प्रेस ने यूरोप में ज्ञान के प्रसार को नई दिशा दी।
- भारत में 16वीं शताब्दी में पहला प्रिंटिंग प्रेस पुर्तगालियों द्वारा स्थापित किया गया।
- भारतीय समाचार पत्रों ने स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- अंग्रेज सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता पर कई प्रतिबंध लगाए।
- स्वतंत्रता के बाद प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया।
- प्रेस आज भी समाज में जागरूकता फैलाने और लोकतंत्र को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
17🎯 अभ्यास प्रश्न
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
अध्याय का सार
प्रेस और मुद्रण ने ज्ञान, शिक्षा, सामाजिक सुधार तथा राजनीतिक विचारों के प्रसार को नई गति दी। गुटेनबर्ग की मुद्रण तकनीक ने यूरोप में मुद्रण क्रांति को मजबूत किया। भारत में प्रेस के विकास के साथ समाचार पत्र सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता के महत्वपूर्ण माध्यम बने। राष्ट्रवादी प्रेस ने ब्रिटिश शासन की आलोचना की और स्वतंत्रता आंदोलन को जनसमर्थन दिलाने में योगदान दिया। ब्रिटिश सरकार ने प्रेस पर नियंत्रण के लिए विभिन्न कानून बनाए, लेकिन राष्ट्रवादी प्रेस की भूमिका जारी रही। स्वतंत्रता के बाद प्रेस लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ बना।
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