कक्षा 10
📝 Ayush Study Point में आप सभी छात्रों का स्वागत हैं 🚀 FREE में बिहार बोर्ड परीक्षा की तैयारी करें 📝 सभी विषयों के नोट्स पढ़ें 🔥 वस्तुनिष्ट, लघु उत्तरीय और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की तैयारी करें 🔥 MCQs Test दें और अपना मूल्यांकन करें। धन्यवाद !

History Chapter 1: Nationalism in Europe | Bihar Board Class 10 Notes

Bihar Board Class 10 History Chapter 1: यूरोप में राष्ट्रवाद
📘 Bihar Board  |  Class 10  |  History

अध्याय 1: यूरोप में राष्ट्रवाद

Nationalism in Europe — सरल Self Study Notes, महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा अभ्यास
📖 आसान भाषा 📅 महत्वपूर्ण तिथियाँ 👤 प्रमुख व्यक्तित्व 🎯 अभ्यास प्रश्न

📖 इस अध्याय के बारे में

यूरोप में 18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान हुए राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तनों ने आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास को गति दी। इस अध्याय में हम समझेंगे कि अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना कैसे विकसित हुई।

फ्रांसीसी क्रांति, वियना सम्मेलन, 1830 और 1848 की क्रांतियाँ, इटली और जर्मनी का एकीकरण तथा यूनान, पोलैंड, हंगरी और बोहेमिया के राष्ट्रीय आंदोलनों को क्रम से समझना इस अध्याय को आसान बना देता है।

क्या पढ़ेंगे? — राष्ट्रवाद और यूरोप के राजनीतिक परिवर्तन | क्या याद रखें? — तिथियाँ, नेता और प्रमुख घटनाएँ | परीक्षा में उपयोग — MCQ, लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

① राष्ट्रवाद क्या है?

राष्ट्रवाद ऐसी भावना है जिसमें लोग अपने साझा इतिहास, भाषा, संस्कृति, परंपराओं और राजनीतिक अधिकारों के आधार पर स्वयं को एक राष्ट्र के रूप में देखते हैं। इससे लोगों में एकता और सामूहिक पहचान की भावना मजबूत होती है।

यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास में फ्रांसीसी क्रांति 1789 का महत्वपूर्ण योगदान रहा। स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों ने पुरानी राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को चुनौती दी।

परीक्षा के लिए याद रखें: 1789 की फ्रांसीसी क्रांति आधुनिक यूरोपीय राष्ट्रवाद के विकास की एक महत्वपूर्ण घटना थी।

② फ्रांसीसी क्रांति और राष्ट्रवाद

1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने यूरोप में नागरिकता और राष्ट्र की अवधारणा को नई दिशा दी। स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार लोगों के बीच तेजी से फैले।

क्रांति ने यह विचार मजबूत किया कि सत्ता केवल किसी राजा या राजवंश की संपत्ति नहीं है, बल्कि नागरिकों की भी राजनीतिक भूमिका होनी चाहिए।

बाद में नेपोलियन बोनापार्ट के शासन के दौरान यूरोप के कई क्षेत्रों में प्रशासनिक और कानूनी परिवर्तन हुए। हालांकि उसकी साम्राज्यवादी नीतियों के विरुद्ध कई क्षेत्रों में राष्ट्रीय भावना भी मजबूत हुई।

मुख्य विचार: फ्रांसीसी क्रांति ने राष्ट्रीय चेतना, नागरिकता और समान अधिकारों की अवधारणाओं को यूरोप में फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

③ 1815 का वियना सम्मेलन

नेपोलियन की हार के बाद यूरोप की राजनीतिक व्यवस्था को पुनर्गठित करने के लिए 1815 में वियना सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें ऑस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख की प्रमुख भूमिका थी।

वियना सम्मेलन के प्रमुख उद्देश्य

नेपोलियन के युद्धों के बाद यूरोप में शांति और स्थिरता स्थापित करना।
यूरोप में शक्ति संतुलन बनाए रखना।
पुराने राजवंशों को पुनः सत्ता में स्थापित करना।
क्रांतिकारी और राष्ट्रवादी विचारों के प्रसार को नियंत्रित करना।

मेटरनिख की भूमिका

मेटरनिख ऑस्ट्रिया के प्रभावशाली चांसलर और रूढ़िवादी नेता थे। वे उदारवाद और राष्ट्रवाद के कारण होने वाले राजनीतिक परिवर्तनों के विरोधी थे। उनका उद्देश्य पुरानी राजशाही व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखना था।

④ 1830 और 1848 की क्रांतियाँ

1830 की जुलाई क्रांति

फ्रांस के राजा चार्ल्स दशम की दमनकारी नीतियों के कारण जनता में असंतोष बढ़ गया। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित किया और राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया।

जुलाई 1830 में जनता ने विद्रोह किया। चार्ल्स दशम को सत्ता छोड़नी पड़ी और वे इंग्लैंड चले गए। इसके बाद लुई फिलिप फ्रांस का राजा बना।

1830 की क्रांति के प्रभाव

फ्रांस में संवैधानिक शासन को बल मिला।
यूरोप में उदारवाद और राष्ट्रवाद मजबूत हुआ।
बेल्जियम के स्वतंत्रता आंदोलन को सफलता मिली।
अन्य राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरणा मिली।

1848 की क्रांति

1848 में यूरोप के अनेक क्षेत्रों में राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों की लहर फैल गई। फ्रांस में आर्थिक कठिनाइयों, बेरोजगारी, महँगाई और राजनीतिक असंतोष ने क्रांति को जन्म दिया।

लुई फिलिप को सत्ता छोड़नी पड़ी और फ्रांस में गणतंत्र की स्थापना हुई। इस क्रांति का प्रभाव यूरोप के अनेक क्षेत्रों तक पहुँचा।

मुख्य बात: 1848 की क्रांतियों में राजनीतिक स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार, संवैधानिक शासन और राष्ट्रीय अधिकारों की मांग प्रमुख थी।

⑤ इटली का एकीकरण

19वीं शताब्दी के आरंभ में इटली एक एकीकृत राष्ट्र नहीं था। वहाँ अनेक राज्य और राजनीतिक इकाइयाँ थीं। कुछ क्षेत्रों पर ऑस्ट्रिया का भी प्रभाव था।

इटली के एकीकरण में मेजिनी, काउंट कावूर, गैरीबाल्डी और विक्टर इमैनुएल द्वितीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

मेजिनी

ज्यूसेपे मेजिनी प्रसिद्ध राष्ट्रवादी विचारक और क्रांतिकारी नेता थे। उन्होंने 1831 में Young Italy नामक संगठन की स्थापना की।

उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और एकीकृत इटली का निर्माण करना था। उनके विचारों ने युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत किया।

काउंट कावूर

काउंट कैमिलो डी कावूर सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कूटनीति और विदेशी सहयोग का उपयोग करके इटली के एकीकरण का मार्ग तैयार किया।

फ्रांस के सहयोग से ऑस्ट्रिया के प्रभाव को कम करने में कावूर की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

गैरीबाल्डी

गैरीबाल्डी प्रसिद्ध सैनिक और राष्ट्रवादी नेता थे। 1860 में उन्होंने अपनी स्वयंसेवी लाल कुर्ती (Red Shirts) सेना के साथ सिसिली और नेपल्स पर विजय प्राप्त की।

बाद में उन्होंने इन क्षेत्रों को विक्टर इमैनुएल द्वितीय के नेतृत्व वाले एकीकृत इटली में शामिल करने का समर्थन किया।

इटली को याद करने का आसान तरीका: मेजिनी = विचार   |   कावूर = कूटनीति   |   गैरीबाल्डी = सैन्य अभियान

⑥ जर्मनी का एकीकरण

19वीं शताब्दी में जर्मन क्षेत्र अनेक राज्यों में विभाजित थे। 1815 के बाद जर्मन परिसंघ में 39 राज्य शामिल थे। इनमें प्रशा और ऑस्ट्रिया प्रमुख शक्तियाँ थीं।

जॉलवेरिन का महत्व

1834 में जॉलवेरिन नामक आर्थिक और सीमा शुल्क संघ की स्थापना हुई। इससे जर्मन राज्यों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंध मजबूत हुए।

बिस्मार्क की भूमिका

प्रशा के प्रधानमंत्री ओट्टो फ़ॉन बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण के लिए कूटनीति और सैन्य शक्ति का उपयोग किया।

डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस के विरुद्ध हुए युद्धों के बाद जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना हुई और विलियम प्रथम जर्मन सम्राट बने।

याद रखें: बिस्मार्क की एकीकरण नीति को अक्सर “लौह और रक्त” की नीति कहा जाता है।

⑦ यूनान में राष्ट्रीयता का उदय

यूनान लंबे समय तक ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था। राष्ट्रवादी विचारों और प्राचीन यूनानी संस्कृति के प्रति यूरोप में बढ़ते आकर्षण ने यूनानियों के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया।

1821 में यूनानियों ने ऑटोमन शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया। ब्रिटेन, फ्रांस और रूस जैसी शक्तियों के समर्थन से आंदोलन को बल मिला।

1832 में यूनान की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली और यूनान एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ।

⑧ यूरोप के अन्य राष्ट्रीय आंदोलन

हंगरी में राष्ट्रवाद

हंगरी ऑस्ट्रियाई साम्राज्य का हिस्सा था। वहाँ के लोगों में अपनी भाषा, संस्कृति और राजनीतिक अधिकारों के प्रति राष्ट्रीय चेतना विकसित हुई।

1848 में स्वतंत्रता और स्वशासन की मांग को लेकर आंदोलन हुआ। लुईस कोसुथ इसके प्रमुख नेताओं में थे।

1867 के ऑस्ट्रो-हंगेरियन समझौते के बाद हंगरी को महत्वपूर्ण स्वायत्तता प्राप्त हुई।

पोलैंड में राष्ट्रवाद

पोलैंड का विभाजन रूस, प्रशा और ऑस्ट्रिया के बीच कर दिया गया था। इसके बावजूद पोलिश लोगों ने अपनी राष्ट्रीय पहचान को बनाए रखा।

पोलिश भाषा, साहित्य, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं ने राष्ट्रीय भावना को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1918 में पोलैंड स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पुनः स्थापित हुआ।

बोहेमिया में राष्ट्रवाद

बोहेमिया ऑस्ट्रियाई साम्राज्य का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र था। वहाँ के लोगों ने अपनी भाषा, संस्कृति और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए राष्ट्रीय आंदोलन चलाए।

1848 के आंदोलनों में बोहेमिया में भी स्वशासन और राजनीतिक अधिकारों की मांग उठी। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1918 में बोहेमिया, मोराविया और स्लोवाकिया को मिलाकर चेकोस्लोवाकिया का गठन हुआ।

⑨ यूरोप में राष्ट्रवाद के प्रमुख परिणाम

इटली का एकीकरण हुआ।
1871 में जर्मनी का एकीकरण हुआ।
राष्ट्रीय एकता और नागरिक अधिकारों की भावना मजबूत हुई।
उदारवाद और लोकतांत्रिक विचारों को बल मिला।
यूरोप का राजनीतिक मानचित्र बदल गया।
बहुराष्ट्रीय साम्राज्यों में राष्ट्रीय आंदोलनों को बढ़ावा मिला।
राष्ट्रवादी प्रतिस्पर्धा और सैन्यवाद से यूरोप में तनाव बढ़ा।
प्रथम विश्वयुद्ध से पहले यूरोप में तनावपूर्ण वातावरण तैयार हुआ।

⑩ 📅 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तिथियाँ

  • 1789 — फ्रांसीसी क्रांति।
  • 1815 — वियना सम्मेलन।
  • 1830 — फ्रांस की जुलाई क्रांति।
  • 1831 — मेजिनी द्वारा Young Italy की स्थापना।
  • 1832 — यूनान की स्वतंत्रता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता।
  • 1834 — जॉलवेरिन की स्थापना।
  • 1848 — यूरोप में क्रांतियों की लहर।
  • 1853–56 — क्रीमिया युद्ध।
  • 1860 — गैरीबाल्डी का सिसिली अभियान।
  • 1863 — पोलैंड में राष्ट्रवादी आंदोलन।
  • 1867 — ऑस्ट्रो-हंगेरियन समझौता।
  • 1870 — फ्रांस–प्रशा युद्ध तथा रोम का इटली में विलय।
  • 1870–71 — इटली के एकीकरण का अंतिम चरण।
  • 1871 — जर्मन साम्राज्य की स्थापना और जर्मनी का एकीकरण।
  • 1914–18 — प्रथम विश्वयुद्ध।
  • 1918 — पोलैंड स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पुनः स्थापित हुआ।

⑪ 👤 महत्वपूर्ण व्यक्तित्व

  • नेपोलियन बोनापार्ट — फ्रांस का सम्राट, जिसके शासन और युद्धों ने यूरोप की राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित किया।
  • मेटरनिख — ऑस्ट्रिया के चांसलर और रूढ़िवादी नेता, जो राष्ट्रवाद और उदारवाद के विरोधी थे।
  • चार्ल्स दशम — फ्रांस का राजा, जिसकी नीतियों के विरुद्ध 1830 की जुलाई क्रांति हुई।
  • लुई फिलिप — 1830 की क्रांति के बाद फ्रांस का राजा बना।
  • मेजिनी — इटली के राष्ट्रवादी विचारक और Young Italy के संस्थापक।
  • काउंट कावूर — सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री और इटली के एकीकरण के प्रमुख कूटनीतिज्ञ।
  • गैरीबाल्डी — राष्ट्रवादी सैनिक नेता और लाल कुर्ती सेना के प्रमुख।
  • विक्टर इमैनुएल द्वितीय — एकीकृत इटली के प्रथम राजा।
  • ओट्टो फ़ॉन बिस्मार्क — प्रशा के प्रधानमंत्री और जर्मनी के एकीकरण के प्रमुख निर्माता।
  • विलियम प्रथम — एकीकृत जर्मन साम्राज्य के प्रथम सम्राट।
  • लुईस कोसुथ — हंगरी के प्रमुख राष्ट्रवादी नेता।
  • लॉर्ड बायरन — प्रसिद्ध अंग्रेज कवि जिन्होंने यूनान के स्वतंत्रता आंदोलन का समर्थन किया।

⑫ परीक्षा सारांश

  • 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने यूरोप में आधुनिक राष्ट्रवाद के विकास को महत्वपूर्ण प्रेरणा दी।
  • 1815 के वियना सम्मेलन का उद्देश्य यूरोप में राजनीतिक स्थिरता और शक्ति संतुलन स्थापित करना था।
  • मेटरनिख रूढ़िवादी विचारों के समर्थक और राष्ट्रवाद तथा उदारवाद के विरोधी थे।
  • 1830 और 1848 की क्रांतियों ने यूरोप में उदारवाद, लोकतंत्र और राष्ट्रवाद को बल दिया।
  • इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर, गैरीबाल्डी और विक्टर इमैनुएल द्वितीय की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
  • जॉलवेरिन ने जर्मन राज्यों के बीच आर्थिक एकता को मजबूत किया।
  • जर्मनी का राजनीतिक एकीकरण 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना के साथ पूरा हुआ।
  • यूनान का स्वतंत्रता आंदोलन 1821 में शुरू हुआ और 1832 में उसकी स्वतंत्रता को मान्यता मिली।
  • पोलिश लोगों ने भाषा और संस्कृति के माध्यम से अपनी राष्ट्रीय पहचान को जीवित रखा।
  • राष्ट्रवादी प्रतिस्पर्धा और सैन्यवाद ने प्रथम विश्वयुद्ध से पहले यूरोप में तनाव बढ़ाया।

⑭ 🎯 अभ्यास प्रश्न

पहले स्वयं उत्तर सोचें, फिर प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें।
एक समय में केवल एक उत्तर खुलेगा। उत्तर छिपाने के लिए उसी प्रश्न पर दोबारा क्लिक करें।
I. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1 इटली एवं जर्मनी वर्तमान में किस महाद्वीप के अंतर्गत आते हैं?
उत्तर: यूरोप।
2 फ्रांस में किस शासक वंश की पुनर्स्थापना वियना कांग्रेस द्वारा की गई थी?
उत्तर: बूर्बो वंश।
3 मेजिनी का संबंध किस संगठन से था?
उत्तर: कार्बोनारी संगठन से।
4 इटली एवं जर्मनी के एकीकरण के विरुद्ध कौन था?
उत्तर: ऑस्ट्रिया।
5 काउंट कावूर को विक्टर इमैनुएल ने किस पद पर नियुक्त किया?
उत्तर: प्रधानमंत्री के पद पर।
6 गैरीबाल्डी पेशे से क्या थे?
उत्तर: नाविक।
7 जर्मन राइन राज्य का निर्माण किसने किया था?
उत्तर: नेपोलियन बोनापार्ट ने।
8 जॉलवेरिन किस प्रकार की संस्था थी?
उत्तर: व्यापारियों का आर्थिक और सीमा शुल्क संघ।
9 “रक्त एवं लौह” की नीति का अवलंबन किसने किया था?
उत्तर: बिस्मार्क ने।
10 फ्रैंकफर्ट की संधि कब हुई?
उत्तर: 1871 ई. में।
11 यूरोपवासियों के लिए किस देश का साहित्य एवं ज्ञान-विज्ञान प्रेरणास्रोत रहा?
उत्तर: जर्मनी।
12 1829 ई. की एड्रियानोपुल की संधि किस देश के साथ हुई?
उत्तर: तुर्की के साथ।
13 किस युद्ध में एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी यूरोपीय महाशक्ति जर्मनी का जन्म हुआ था?
उत्तर: फ्रांस-प्रशा युद्ध में।
14 सेडान का युद्ध किन दो देशों के बीच हुआ था?
उत्तर: फ्रांस और प्रशा के बीच।
15 1848 की फ्रांसीसी क्रांति ने किस युग का अंत कर दिया?
उत्तर: लुई फिलिप के शासन का।
16 वेटिकन सिटी के राजमहल में कौन रहते थे?
उत्तर: पोप।
17 वेटिकन सिटी इटली के किस कार्य से बचा रहा?
उत्तर: इटली के एकीकरण से।
18 यूनान को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने के बाद बावेरिया के शासक किसे वहाँ का राजा घोषित किया गया?
उत्तर: ऑटो को।
19 हंगरी की राजधानी क्या है?
उत्तर: बुडापेस्ट।
20 मेजिनी किस देश से संबंधित थे?
उत्तर: इटली।
21 हीगेल किस रूप में प्रसिद्ध थे?
उत्तर: दार्शनिक।
22 बिस्मार्क किस पद से प्रसिद्ध हुए?
उत्तर: जर्मन चांसलर।
23 विक्टर इमैनुएल द्वितीय किस रूप में प्रसिद्ध थे?
उत्तर: एकीकृत इटली के राजा और राजनीतिज्ञ के रूप में।
24 वियना सम्मेलन किस अवधि में हुआ था?
उत्तर: 1814–15 ई. में।
25 मेटरनिख का पतन किस वर्ष हुआ?
उत्तर: 1848 ई. में।
26 इटली का एकीकरण किस वर्ष के आसपास पूरा हुआ?
उत्तर: 1870 ई. में रोम के विलय के साथ एकीकरण की प्रक्रिया पूरी हुई।
27 सेडान का युद्ध किस वर्ष हुआ?
उत्तर: 1870 ई. में।
28 लुईस कोसुथ किस देश के राष्ट्रवादी नेता थे?
उत्तर: हंगरी के।
29 एड्रियानोपुल की संधि किस वर्ष हुई?
उत्तर: 1829 ई. में।
30 यूनान की स्वतंत्रता को किस वर्ष मान्यता मिली?
उत्तर: 1832 ई. में।
31 पोलैंड में प्रमुख राष्ट्रवादी आंदोलन किस वर्ष हुआ था?
उत्तर: 1863 ई. में।
32 राष्ट्रवाद क्या है?
उत्तर: राष्ट्रवाद अपने राष्ट्र की साझा पहचान, एकता और राजनीतिक अधिकारों के प्रति सामूहिक भावना है।
33 मेजिनी कौन थे?
उत्तर: मेजिनी इटली के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी विचारक और Young Italy के संस्थापक थे।
34 जर्मनी के एकीकरण की प्रमुख बाधाएँ क्या थीं?
उत्तर: जर्मन राज्यों का विभाजन और ऑस्ट्रिया का राजनीतिक प्रभाव प्रमुख बाधाओं में थे।
35 मेटरनिख युग क्या था?
उत्तर: नेपोलियन के बाद यूरोप में मेटरनिख के नेतृत्व में रूढ़िवादी व्यवस्था और राष्ट्रवादी आंदोलनों को दबाने की नीति का काल मेटरनिख युग कहलाता है।
II. लघु उत्तरीय प्रश्न
36 1848 की फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण क्या थे?
उत्तर: 1848 की फ्रांसीसी क्रांति के प्रमुख कारण आर्थिक संकट, बेरोजगारी, महँगाई और खाद्य संकट थे। जनता राजनीतिक अधिकारों से भी वंचित थी। लोग शासन में अपनी भागीदारी और संवैधानिक सुधार चाहते थे।
37 इटली और जर्मनी के एकीकरण में ऑस्ट्रिया की भूमिका क्या थी?
उत्तर: ऑस्ट्रिया इटली और जर्मन क्षेत्रों में एक शक्तिशाली राज्य था। वह राष्ट्रवादी आंदोलनों का विरोध करता था। उसके प्रभाव के कारण इटली और जर्मनी के एकीकरण में कठिनाइयाँ आईं। इसलिए ऑस्ट्रिया एकीकरण की प्रमुख बाधाओं में से एक था।
38 यूरोप में राष्ट्रवाद को फैलाने में नेपोलियन किस प्रकार सहायक हुआ?
उत्तर: नेपोलियन ने यूरोप के कई क्षेत्रों में प्रशासनिक और कानूनी सुधार किए। उसने समान कानून और आधुनिक प्रशासन को बढ़ावा दिया। इससे लोगों में एकता की भावना विकसित हुई। उसके साम्राज्यवादी शासन के विरोध में भी विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्रीय भावना मजबूत हुई।
39 गैरीबाल्डी के कार्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर: गैरीबाल्डी इटली के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता और सैनिक थे। 1860 में उन्होंने अपनी लाल कुर्ती सेना के साथ सिसिली और नेपल्स पर विजय प्राप्त की। बाद में उन्होंने इन क्षेत्रों को विक्टर इमैनुएल द्वितीय को सौंप दिया। इससे इटली के एकीकरण में बड़ी सहायता मिली।
40 विलियम प्रथम के बिना जर्मनी का एकीकरण बिस्मार्क के लिए कठिन क्यों था?
उत्तर: विलियम प्रथम प्रशा के राजा थे और उन्होंने बिस्मार्क को पूरा राजनीतिक समर्थन दिया। प्रशा की सेना और राजा के सहयोग से बिस्मार्क अपनी एकीकरण की नीति को लागू कर सके। इसलिए विलियम प्रथम का समर्थन जर्मनी के एकीकरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण था।
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
41 इटली के एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी के योगदानों को बताइए।
उत्तर:

इटली 19वीं शताब्दी में कई छोटे-बड़े राज्यों में बँटा हुआ था। इसके एकीकरण में मेजिनी, कावूर और गैरीबाल्डी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मेजिनी ने इटली में राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत किया। उन्होंने 1831 में यंग इटली संगठन की स्थापना की। उनका उद्देश्य एक स्वतंत्र और एकीकृत इटली बनाना था।

काउंट कावूर सार्डिनिया-पीडमॉन्ट के प्रधानमंत्री थे। उन्होंने कूटनीति और युद्ध के माध्यम से ऑस्ट्रिया के प्रभाव को कम किया।

गैरीबाल्डी ने लाल कुर्ती सेना के साथ 1860 में सिसिली और नेपल्स पर विजय प्राप्त की। बाद में इन क्षेत्रों को एकीकृत इटली में शामिल किया गया। इस प्रकार तीनों नेताओं ने अलग-अलग तरीकों से इटली के एकीकरण में योगदान दिया।

42 जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का वर्णन कीजिए।
उत्तर:

19वीं शताब्दी में जर्मन क्षेत्र कई राज्यों में बँटे हुए थे। प्रशा इन राज्यों में सबसे शक्तिशाली राज्यों में से एक था। जॉलवेरिन ने जर्मन राज्यों के बीच आर्थिक एकता को मजबूत किया।

प्रशा के प्रधानमंत्री ओट्टो फ़ॉन बिस्मार्क ने जर्मनी के एकीकरण का नेतृत्व किया। उन्होंने कूटनीति और सैन्य शक्ति का प्रयोग किया। उन्होंने डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस के विरुद्ध युद्ध किए।

इन युद्धों के बाद जर्मन राज्यों का एकीकरण मजबूत हुआ। 1871 में जर्मन साम्राज्य की स्थापना हुई और विलियम प्रथम जर्मन सम्राट बने। बिस्मार्क की नीति को “लौह और रक्त” की नीति कहा गया।

43 राष्ट्रवाद के उदय के कारणों एवं उसके प्रभाव की चर्चा कीजिए।
उत्तर:

यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के कई कारण थे। 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों को फैलाया। इन विचारों से लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित हुई।

नेपोलियन के शासन से प्रशासनिक और कानूनी सुधार हुए। इसके बाद 1830 और 1848 की क्रांतियों ने उदारवाद और राष्ट्रवाद को और मजबूत किया। साहित्य और संस्कृति ने भी राष्ट्रीय भावना को बढ़ाने में सहायता की।

राष्ट्रवाद के कारण इटली और जर्मनी का एकीकरण हुआ और यूरोप का राजनीतिक मानचित्र बदल गया। लेकिन बाद में राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और सैन्यवाद बढ़ने से यूरोप में तनाव भी बढ़ा।

44 जुलाई 1830 की क्रांति का विस्तृत वर्णन कीजिए।
उत्तर:

फ्रांस में चार्ल्स दशम की नीतियों से जनता में असंतोष बढ़ गया था। उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया और राजनीतिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया। इससे जनता और सरकार के बीच संघर्ष बढ़ गया।

जुलाई 1830 में फ्रांस की जनता ने विद्रोह कर दिया। कई दिनों तक संघर्ष हुआ और अंत में चार्ल्स दशम को गद्दी छोड़नी पड़ी। वे इंग्लैंड चले गए। इसके बाद लुई फिलिप फ्रांस का राजा बना।

इस क्रांति से फ्रांस में संवैधानिक शासन को बल मिला। इससे यूरोप के अन्य देशों में भी उदारवादी और राष्ट्रवादी आंदोलनों को प्रेरणा मिली।

45 यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
उत्तर:

यूनान लंबे समय तक ऑटोमन साम्राज्य के अधीन था। यूनानियों में अपनी प्राचीन संस्कृति और गौरव के कारण स्वतंत्रता की भावना विकसित हुई। यूरोप में फैले राष्ट्रवाद के विचारों ने भी यूनानी स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरणा दी।

1821 में यूनानियों ने ऑटोमन शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलन शुरू किया। इस आंदोलन को ब्रिटेन, फ्रांस और रूस जैसी यूरोपीय शक्तियों का समर्थन मिला।

लंबे संघर्ष के बाद 1832 में यूनान की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली और यूनान एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया।

📚 Self Study करने का सही तरीका

पहले ऊपर दिए गए topics को क्रम से पढ़ें। इसके बाद महत्वपूर्ण तिथियों और व्यक्तित्वों को दोहराएँ। अंत में अभ्यास प्रश्नों को बिना उत्तर देखे हल करें।

जिन प्रश्नों का उत्तर याद न हो, केवल उसी प्रश्न को खोलकर उत्तर देखें। फिर उत्तर बंद करके दोबारा स्वयं उत्तर देने का प्रयास करें।

1789 → 1815 → 1830 → 1848 → इटली → जर्मनी → अन्य राष्ट्रीय आंदोलन → प्रथम विश्वयुद्ध

🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन

यूरोप में राष्ट्रवाद ने 19वीं शताब्दी की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया। 1789 की फ्रांसीसी क्रांति ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों को फैलाया। 1815 के वियना सम्मेलन ने पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने का प्रयास किया, लेकिन 1830 और 1848 की क्रांतियों ने उदारवाद और राष्ट्रवाद को नई शक्ति दी।

इटली और जर्मनी का एकीकरण यूरोपीय राष्ट्रवाद की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ रहीं। यूनान, पोलैंड, हंगरी और बोहेमिया में भी राष्ट्रीय पहचान और राजनीतिक अधिकारों के लिए आंदोलन हुए।

इस प्रकार राष्ट्रवाद ने यूरोप के राजनीतिक मानचित्र को बदल दिया। राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और सैन्यवाद के बढ़ने से प्रथम विश्वयुद्ध से पहले यूरोप में तनावपूर्ण वातावरण भी तैयार हुआ।

अब स्वयं जाँचें — क्या आप इस अध्याय की प्रमुख तिथियाँ, व्यक्तित्व और घटनाएँ बिना नोट्स देखे बता सकते हैं?

Comments

Popular posts from this blog

Economics Chapter 1: Economy and Its Development | Bihar Board Class 10 Notes