History Chapter 7: Trade and Globalization | Bihar Board Class 10 Notes
अध्याय 7: व्यापार और भूमंडलीकरण
① व्यापार और भूमंडलीकरण
व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के खरीदने और बेचने की प्रक्रिया है। भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है, जिसमें विश्व के विभिन्न देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीक और सूचनाओं का आदान-प्रदान बढ़ता है। आधुनिक समय में व्यापार और भूमंडलीकरण विश्व अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं।
② प्राचीन व्यापार और विश्व बाजार
प्राचीन भारत का व्यापार मिस्र और मेसोपोटामिया जैसी सभ्यताओं से होता था। दिलमुन (वर्तमान बहरीन) और मकरान तट (मेलुहा) प्रमुख व्यापारिक केंद्र थे। अलेक्जेंड्रिया एशिया, अफ्रीका और यूरोप के व्यापारियों का महत्वपूर्ण केंद्र था।
③ औद्योगिक क्रांति और व्यापार
1750 के बाद औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई। मशीनों और वाष्प इंजन के उपयोग से बड़े पैमाने पर उत्पादन होने लगा। इंग्लैंड इसका प्रमुख केंद्र था। उत्पादन बढ़ने से व्यापार का विस्तार हुआ और विश्व बाजार विकसित होने लगा।
18वीं शताब्दी के मध्य से इंग्लैंड में बड़े कारखानों की स्थापना होने लगी। औद्योगिक क्रांति के कारण उत्पादन और कच्चे माल की मांग बढ़ गई। मैनचेस्टर, लिवरपूल और लंदन बड़े औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र बने।
④ उपनिवेशवाद और विश्व बाजार
यूरोपीय देशों ने कच्चे माल और नए बाजारों की आवश्यकता पूरी करने के लिए एशिया, अफ्रीका और अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किए। भारत से कपास, नील और अन्य कच्चा माल इंग्लैंड भेजा जाता था। बदले में इंग्लैंड में बने सामान भारत में बेचे जाते थे। इससे भारत के कुटीर और हस्तशिल्प उद्योगों का पतन हुआ।
व्यापार, श्रमिक पलायन और पूँजी प्रवाह
विश्व व्यापार के विस्तार के साथ श्रमिकों का पलायन बढ़ा। भारत सहित कई देशों से मजदूरों को गिरमिटिया श्रमिक बनाकर गन्ना, चाय और तंबाकू के बागानों में काम करने के लिए भेजा गया। यूरोपीय देशों ने रेल, खदान, बागानों और कृषि में पूँजी का निवेश किया।
विश्व बाजार के लाभ और हानियाँ
⑤ प्रथम विश्व युद्ध और 1929 की महामंदी
1914–1918 के प्रथम विश्व युद्ध के बाद यूरोप की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और इटली के उद्योग और व्यापार प्रभावित हुए। दूसरी ओर अमेरिका ने कर्ज और निर्यात के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की।
1929 की महामंदी
1929 की महामंदी का मुख्य कारण उत्पादन और मांग के बीच असंतुलन था। वस्तुओं का उत्पादन अधिक हुआ, लेकिन लोगों की क्रय शक्ति कम थी। अमेरिका में शेयर बाजार में भारी गिरावट आई, जिसे वॉल स्ट्रीट क्रैश कहा जाता है। इसके बाद बैंक बंद होने लगे, उद्योग प्रभावित हुए और बेरोजगारी बढ़ गई।
महामंदी के प्रभाव
- अमेरिका और यूरोप में बेरोजगारी बढ़ी।
- जर्मनी में आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी।
- ब्रिटेन के व्यापार पर बुरा प्रभाव पड़ा।
- भारत में कृषि उत्पादों के दाम गिर गए और किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हुई।
महामंदी से निपटने के प्रयास
1933 में अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट ने न्यू डील योजना लागू की। इसके तहत रोजगार के अवसर पैदा किए गए, बैंकों में सुधार किए गए और किसानों को सहायता दी गई। 1932 के ओटावा समझौते से ब्रिटेन और उसके उपनिवेशों के बीच व्यापार बढ़ाने का प्रयास किया गया।
⑥ ब्रेटन वुड्स सम्मेलन और नई आर्थिक व्यवस्था
1944 में ब्रेटन वुड्स सम्मेलन आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विश्व अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाना और युद्ध के बाद आर्थिक पुनर्निर्माण करना था। इसी सम्मेलन से नई अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की नींव पड़ी।
IMF और विश्व बैंक
इस व्यवस्था में अमेरिकी डॉलर को अंतरराष्ट्रीय महत्व मिला।
⑦ शीत युद्ध और आर्थिक प्रतिस्पर्धा
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया दो गुटों में बँट गई। अमेरिका पूँजीवादी व्यवस्था का समर्थक था, जबकि सोवियत संघ साम्यवादी व्यवस्था का समर्थक था। दोनों के बीच आर्थिक और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ी।
मार्शल प्लान
1948 में अमेरिका ने मार्शल प्लान शुरू किया। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध से प्रभावित पश्चिमी यूरोपीय देशों को आर्थिक सहायता देना था। इससे उद्योग, व्यापार और अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में मदद मिली।
COMECON
COMECON सोवियत संघ के नेतृत्व में बनाया गया आर्थिक संगठन था। इसका उद्देश्य साम्यवादी देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाना था।
EEC और EU
1957 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) की स्थापना हुई। 1993 में यूरोपीय संघ (EU) का गठन हुआ। इन संस्थाओं का उद्देश्य यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना था।
⑧ भूमंडलीकरण का उदय और WTO
1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद भूमंडलीकरण की गति तेज हुई। देशों के बीच व्यापार और निवेश की कई बाधाएँ कम हुईं। परिवहन, संचार और इंटरनेट के विकास से दुनिया पहले की तुलना में अधिक जुड़ गई।
विश्व व्यापार संगठन (WTO)
1995 में विश्व व्यापार संगठन की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना और व्यापार संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। WTO व्यापारिक विवादों के समाधान में भी सहायता करता है।
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वे कंपनियाँ हैं, जो एक साथ कई देशों में अपना व्यापार करती हैं। इन कंपनियों ने विश्व व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाए, लेकिन स्थानीय उद्योगों के सामने प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी।
⑨ भारत पर भूमंडलीकरण का प्रभाव
1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत में विदेशी निवेश बढ़ा। सूचना प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर उद्योग का तेजी से विकास हुआ। बेंगलुरु और हैदराबाद तकनीकी केंद्र बने। भूमंडलीकरण से आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला, लेकिन आय असमानता, पर्यावरण प्रदूषण और स्थानीय उद्योगों पर दबाव जैसी चुनौतियाँ भी सामने आईं।
⑩ 📅 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण वर्ष
- 1750 के बाद — औद्योगिक क्रांति की शुरुआत।
- 1914–1918 — प्रथम विश्व युद्ध।
- 1929 — महामंदी।
- 1932 — ओटावा समझौता।
- 1933 — न्यू डील योजना।
- 1944 — ब्रेटन वुड्स सम्मेलन।
- 1945 — संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना।
- 1948 — मार्शल प्लान।
- 1957 — EEC की स्थापना।
- 1991 — भारत में आर्थिक उदारीकरण और सोवियत संघ का विघटन।
- 1993 — यूरोपीय संघ का गठन।
- 1995 — WTO की स्थापना।
⑪ 👤 महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
- जेम्स वॉट — वाष्प इंजन के विकासकर्ता।
- हेनरी फोर्ड — आधुनिक औद्योगिक उत्पादन पद्धति के विकास में योगदान देने वाले उद्योगपति।
- फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट — न्यू डील योजना के प्रवर्तक।
⑫ 🏛️ महत्वपूर्ण संस्थाएँ और समझौते
⑬ 🔑 महत्वपूर्ण शब्द
⑭ 📌 परीक्षा सारांश
- औद्योगिक क्रांति के बाद विश्व व्यापार का तेजी से विस्तार हुआ।
- इंग्लैंड औद्योगिक क्रांति का प्रमुख केंद्र था।
- उपनिवेशवाद के कारण भारत के कुटीर और हस्तशिल्प उद्योगों को भारी नुकसान हुआ।
- 1929 की महामंदी एक गंभीर विश्वव्यापी आर्थिक संकट थी।
- 1944 के ब्रेटन वुड्स सम्मेलन से IMF और विश्व बैंक की स्थापना की नींव पड़ी।
- 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत में भूमंडलीकरण की गति तेज हुई।
- 1995 में WTO की स्थापना हुई।
- भूमंडलीकरण से व्यापार, तकनीक और रोजगार के अवसर बढ़े, लेकिन स्थानीय उद्योगों और आय समानता के सामने चुनौतियाँ भी आईं।
⑮ 🎯 अभ्यास प्रश्न
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
अध्याय का सार
व्यापार और भूमंडलीकरण ने विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। औद्योगिक क्रांति ने उत्पादन और विश्व बाजार को विस्तार दिया, जबकि उपनिवेशवाद ने संसाधनों और बाजारों पर नियंत्रण बढ़ाया। 1929 की महामंदी और दो विश्व युद्धों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया। ब्रेटन वुड्स व्यवस्था, IMF, विश्व बैंक और बाद में WTO जैसी संस्थाओं ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों को नया रूप दिया। 1991 के बाद भारत में आर्थिक उदारीकरण से भूमंडलीकरण की गति तेज हुई।
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