History Chapter 4: Nationalism in India | Bihar Board Class 10 Notes
अध्याय 4: भारत में राष्ट्रवाद
📖 इस अध्याय के बारे में
भारत में राष्ट्रवाद का उदय 19वीं शताब्दी के अंत और 20वीं शताब्दी की शुरुआत में हुआ। इसका उद्देश्य भारतीयों को एकजुट कर अंग्रेजी शासन का विरोध करना और स्वतंत्रता प्राप्त करना था। इससे देशभक्ति, एकता और स्वतंत्रता की भावना मजबूत हुई।
1.भारत में राष्ट्रवाद के उदय के कारण
राजनीतिक कारण
ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों, वर्नाक्युलर एक्ट, आर्म्स एक्ट, इलबर्ट बिल विवाद और बंगाल विभाजन से असंतोष बढ़ा। अंग्रेजी शिक्षा, रेलवे, डाक और टेलीग्राफ ने देश के लोगों को आपस में जोड़ा।
आर्थिक कारण
अधिक कर, भारतीय उद्योगों की उपेक्षा और संसाधनों के शोषण से किसान, कारीगर और व्यापारी परेशान हुए।
सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारण
अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के साथ भेदभाव और सरकारी नौकरियों में पक्षपात से राष्ट्रीय भावना मजबूत हुई। राजा राममोहन राय और स्वामी विवेकानन्द जैसे समाज सुधारकों ने आत्मसम्मान और राष्ट्रीय चेतना जगाई।
2.प्रथम विश्वयुद्ध और भारत
प्रथम विश्वयुद्ध में भारत ने अंग्रेजों को सैनिकों और धन से सहायता दी। भारतीयों को युद्ध के बाद स्वशासन की आशा थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। महँगाई, बेरोज़गारी, रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग जैसी घटनाओं से असंतोष बढ़ गया।
3.रॉलेट एक्ट के विरोध में सत्याग्रह
1919 में रॉलेट एक्ट पारित हुआ। इसके तहत सरकार बिना मुकदमे के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती थी। महात्मा गांधी ने 6 अप्रैल 1919 को इसके विरोध में देशव्यापी सत्याग्रह शुरू किया।
4.जलियांवाला बाग हत्याकांड
13 अप्रैल 1919 को अमृतसर के जलियांवाला बाग में जनरल डायर ने शांतिपूर्ण सभा पर गोली चलवा दी। सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए। इस घटना से पूरे देश में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आक्रोश फैल गया।
रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने नाइटहुड की उपाधि लौटाई और गांधीजी ने कायसर-ए-हिंद की उपाधि त्याग दी।
5.खिलाफत आंदोलन
खिलाफत आंदोलन 1919–1924 तक चला। इसका नेतृत्व अली बंधुओं ने किया। महात्मा गांधी ने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता का अवसर मानकर असहयोग आंदोलन से जोड़ दिया।
6.असहयोग आंदोलन
असहयोग आंदोलन 1920 में गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य अहिंसक तरीके से ब्रिटिश शासन का विरोध कर स्वराज प्राप्त करना था। लोगों ने सरकारी स्कूलों, अदालतों, नौकरियों और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया।
1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया।
7.साइमन कमीशन और नेहरू रिपोर्ट
1927 में साइमन कमीशन का गठन भारत सरकार अधिनियम 1919 की समीक्षा के लिए किया गया। इसमें कोई भारतीय सदस्य नहीं था। इसलिए पूरे देश में इसका विरोध हुआ और “Simon Go Back” का नारा लगाया गया। लाहौर में विरोध के दौरान लाठीचार्ज में लाला लाजपत राय घायल हुए और बाद में उनका निधन हो गया।
1928 में मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में नेहरू रिपोर्ट तैयार हुई। इसमें भारत को डोमिनियन स्टेटस, मूल अधिकार और संघीय शासन देने का सुझाव दिया गया। ब्रिटिश सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
8.सविनय अवज्ञा आंदोलन
सविनय अवज्ञा आंदोलन 1930 में गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ। 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़ा। इसके बाद विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार, कर न देना और अन्यायपूर्ण कानूनों का विरोध किया गया।
आंदोलन के कारण
- ✓ नेहरू रिपोर्ट की अस्वीकृति।
- ✓ नमक कर।
- ✓ पूर्ण स्वराज की मांग।
- ✓ ब्रिटिश दमनकारी नीतियाँ।
- ✓ गांधीजी की मांगों की उपेक्षा।
परिणाम
इस आंदोलन से राष्ट्रीय चेतना मजबूत हुई। गांधी-इरविन समझौता हुआ और गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया। हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन स्वतंत्रता आंदोलन को नई शक्ति मिली।
9.गांधी-इरविन समझौता और गोलमेज सम्मेलन
1931 में गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौता हुआ। सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित किया गया। राजनीतिक कैदियों की रिहाई और नमक बनाने की अनुमति जैसे प्रावधान स्वीकार किए गए। गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
ब्रिटिश सरकार ने 1930–1932 के बीच लंदन में तीन गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए। दूसरे सम्मेलन में गांधीजी ने कांग्रेस का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला।
10.पूना पैक्ट
24 सितंबर 1932 को महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच पूना पैक्ट हुआ। इसमें अलग निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन के साथ आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्वीकार की गई।
11.प्रमुख किसान और जन आंदोलन
चंपारण आंदोलन — 1917
चंपारण आंदोलन गांधीजी का भारत में पहला सफल सत्याग्रह था। यह बिहार के चंपारण में नील की जबरन खेती और तीन काठिया प्रथा के विरोध में हुआ। गांधीजी के प्रयास से किसानों को राहत मिली और तीन काठिया प्रथा समाप्त हुई।
खेड़ा आंदोलन — 1918
खेड़ा आंदोलन गुजरात में अकाल के समय किसानों द्वारा कर माफी की मांग को लेकर हुआ। गांधीजी और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में किसानों ने कर देने से इनकार किया। अंततः सरकार को कर में राहत देनी पड़ी।
मोपला विद्रोह — 1921
मोपला विद्रोह केरल के मालाबार क्षेत्र में हुआ। इसका मुख्य कारण किसानों का शोषण था। यह खिलाफत और असहयोग आंदोलनों से प्रभावित था। बाद में यह सांप्रदायिक रूप ले बैठा और ब्रिटिश सरकार ने इसे दबा दिया।
बारदोली सत्याग्रह — 1928
गुजरात के बारदोली में भू-राजस्व में 22% वृद्धि के विरोध में किसानों ने आंदोलन किया। इसका नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया। सरकार को कर वृद्धि वापस लेनी पड़ी और पटेल को “सरदार” की उपाधि मिली।
12.प्रमुख राजनीतिक एवं सामाजिक संगठन
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को मुंबई में ए. ओ. ह्यूम के प्रयास से हुई। पहले अधिवेशन की अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की और 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बाद में कांग्रेस स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख संगठन बनी।
मुस्लिम लीग
मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसंबर 1906 को ढाका में हुई। इसका उद्देश्य मुस्लिमों के राजनीतिक अधिकारों की रक्षा करना था। बाद में इसने अलग निर्वाचन और पाकिस्तान की मांग का समर्थन किया।
स्वराज पार्टी
स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी 1923 को चित्तरंजन दास और मोतीलाल नेहरू ने की। इसका उद्देश्य विधान परिषदों में प्रवेश करके ब्रिटिश नीतियों का विरोध करना था।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)
RSS की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की। इसका उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना तथा अनुशासन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करना था।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI)
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना 1925 में कानपुर में हुई। इसका उद्देश्य मजदूरों और किसानों के अधिकारों की रक्षा तथा समाजवादी विचारों को बढ़ावा देना था।
मेरठ षड्यंत्र केस
1929 के मेरठ षड्यंत्र केस में ब्रिटिश सरकार ने कम्युनिस्ट नेताओं और मजदूर संगठनों के कार्यकर्ताओं पर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध लोगों को भड़काने का आरोप लगाया। इस मुकदमे ने मजदूर आंदोलनों को प्रेरणा दी।
लाहौर षड्यंत्र केस
1915 का लाहौर षड्यंत्र केस गदर पार्टी और भारतीय क्रांतिकारियों की अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति की योजना से संबंधित था। इसमें कर्तार सिंह सराभा, विष्णु गणेश पिंगले और रासबिहारी बोस जैसे क्रांतिकारी शामिल थे।
13.भारत छोड़ो आंदोलन — 1942
भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को गांधीजी के नेतृत्व में शुरू हुआ। इसका उद्देश्य अंग्रेजी शासन को भारत से समाप्त करना था। गांधीजी ने “करो या मरो” का नारा दिया। नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद जनता ने आंदोलन जारी रखा।
कारण
- ✓ द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत को बिना अनुमति शामिल करना।
- ✓ क्रिप्स मिशन की असफलता।
- ✓ ब्रिटिश दमनकारी नीतियाँ।
- ✓ पूर्ण स्वतंत्रता की बढ़ती मांग।
परिणाम
इस आंदोलन में किसान, मजदूर, विद्यार्थी और महिलाओं ने भाग लिया। अंग्रेजों को यह समझ आने लगा कि भारत पर लंबे समय तक शासन करना संभव नहीं है। अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
14.भारत में राष्ट्रवाद का महत्व
राष्ट्रवाद ने भारतीयों को एकजुट किया और देशभक्ति की भावना विकसित की। विभिन्न धर्मों, भाषाओं और क्षेत्रों के लोगों ने स्वतंत्रता के लिए मिलकर संघर्ष किया। इसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
15.📅 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण वर्ष
- 1885 — भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।
- 1906 — मुस्लिम लीग की स्थापना।
- 1917 — चंपारण आंदोलन।
- 1918 — खेड़ा आंदोलन।
- 1919 — रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड।
- 1919–24 — खिलाफत आंदोलन।
- 1920–22 — असहयोग आंदोलन।
- 1921 — मोपला विद्रोह।
- 1923 — स्वराज पार्टी।
- 1925 — RSS और CPI की स्थापना।
- 1927 — साइमन कमीशन।
- 1928 — बारदोली सत्याग्रह और नेहरू रिपोर्ट।
- 1929 — मेरठ षड्यंत्र केस।
- 1930 — सविनय अवज्ञा आंदोलन।
- 1931 — गांधी-इरविन समझौता।
- 1932 — पूना पैक्ट।
- 1942 — भारत छोड़ो आंदोलन।
- 1947 — भारत की स्वतंत्रता।
16.👤 महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
- महात्मा गांधी — सत्याग्रह, असहयोग, सविनय अवज्ञा और भारत छोड़ो आंदोलन के प्रमुख नेता।
- मोतीलाल नेहरू — नेहरू रिपोर्ट के अध्यक्ष और स्वराज पार्टी के संस्थापकों में से एक।
- सरदार वल्लभभाई पटेल — खेड़ा और बारदोली सत्याग्रह के प्रमुख नेता।
- चित्तरंजन दास — स्वराज पार्टी के संस्थापक।
- डॉ. भीमराव अंबेडकर — पूना पैक्ट के प्रमुख नेता।
- डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार — RSS के संस्थापक।
- ए. ओ. ह्यूम — कांग्रेस की स्थापना में प्रमुख भूमिका।
- लाला लाजपत राय — साइमन कमीशन विरोध के प्रमुख नेता।
17.📢 महत्वपूर्ण नारे
- “करो या मरो” — महात्मा गांधी।
- “Simon Go Back” — साइमन कमीशन के विरोध में।
18. 📌 परीक्षा सारांश
- भारत का पहला सफल सत्याग्रह — चंपारण आंदोलन (1917)।
- कांग्रेस की स्थापना — 28 दिसंबर 1885।
- मुस्लिम लीग की स्थापना — 30 दिसंबर 1906।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड — 13 अप्रैल 1919।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत — दांडी यात्रा, 12 मार्च 1930।
- नमक कानून भंग — 6 अप्रैल 1930।
- पूना पैक्ट — 24 सितंबर 1932।
- भारत छोड़ो आंदोलन — 8 अगस्त 1942।
- भारत की स्वतंत्रता — 15 अगस्त 1947।
19.🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन
- 1885 → भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना
- 1917 → चंपारण आंदोलन
- 1919 → रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग
- 1920–22 → असहयोग आंदोलन
- 1930 → दांडी यात्रा और सविनय अवज्ञा आंदोलन
- 1931 → गांधी-इरविन समझौता
- 1932 → पूना पैक्ट
- 1942 → भारत छोड़ो आंदोलन
- 1947 → भारत स्वतंत्र हुआ
20.🎯 अभ्यास प्रश्न
उत्तर को दोबारा छिपाने के लिए प्रश्न पर फिर से क्लिक करें।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
प्रथम विश्वयुद्ध के समय भारत ने अंग्रेजों को सैनिकों और धन से सहायता दी। भारतीय नेताओं को आशा थी कि युद्ध के बाद अंग्रेज भारत को स्वशासन देंगे। लेकिन युद्ध के बाद ऐसी अपेक्षाएँ पूरी नहीं हुईं।
युद्ध के कारण महँगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक कठिनाइयाँ बढ़ीं। इसके बाद रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग हत्याकांड जैसी घटनाओं से जनता में आक्रोश बढ़ा। इस स्थिति ने राष्ट्रीय आंदोलन को मजबूत किया और गांधीजी के नेतृत्व में जन आंदोलनों के लिए वातावरण तैयार हुआ।
असहयोग आंदोलन के पीछे रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत प्रश्न और ब्रिटिश शासन के प्रति बढ़ता असंतोष प्रमुख कारण थे। गांधीजी ने 1920 में अहिंसक असहयोग के माध्यम से स्वराज प्राप्त करने का प्रयास किया।
लोगों ने सरकारी स्कूलों, अदालतों, नौकरियों और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया। आंदोलन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया। फिर भी इससे राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जनाधार मिला।
सविनय अवज्ञा आंदोलन के पीछे कई कारण थे। नेहरू रिपोर्ट को ब्रिटिश सरकार द्वारा स्वीकार नहीं किया गया। नमक कर आम जनता के लिए अन्यायपूर्ण माना गया। भारतीयों में पूर्ण स्वराज की मांग तेज हो रही थी और ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों से असंतोष बढ़ रहा था।
गांधीजी की मांगों की उपेक्षा भी आंदोलन का कारण बनी। 12 मार्च 1930 को गांधीजी ने साबरमती से दांडी यात्रा शुरू की और 6 अप्रैल को नमक कानून तोड़ा। इसके बाद आंदोलन पूरे देश में फैल गया।
औद्योगिक विकास के साथ भारत में मजदूरों की संख्या बढ़ी। मजदूरों को कम मजदूरी, लंबे काम के घंटे और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था। इसलिए मजदूरों ने अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आंदोलन शुरू किए।
समाजवादी और साम्यवादी विचारों ने भी मजदूर आंदोलनों को प्रभावित किया। 1925 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई। 1929 के मेरठ षड्यंत्र केस में कम्युनिस्ट नेताओं और मजदूर कार्यकर्ताओं पर मुकदमा चलाया गया। इन घटनाओं से मजदूर आंदोलन को नई दिशा मिली।
महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को व्यापक जन आंदोलन बनाया। उन्होंने सत्य और अहिंसा को संघर्ष का आधार बनाया। 1917 में चंपारण सत्याग्रह से उन्होंने किसानों की समस्याओं को उठाया। 1918 में खेड़ा आंदोलन में किसानों का नेतृत्व किया।
उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन, 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन और 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किया। उनके आंदोलनों में किसान, मजदूर, विद्यार्थी और महिलाएँ भी शामिल हुए। इस प्रकार गांधीजी ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाया।
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में वामपंथियों ने मजदूरों और किसानों के अधिकारों को प्रमुखता दी। समाजवादी और साम्यवादी विचारों के प्रभाव से मजदूर संगठनों और किसान आंदोलनों को नई दिशा मिली। 1925 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई।
वामपंथी नेताओं ने आर्थिक असमानता, शोषण और मजदूरों की समस्याओं के विरुद्ध आवाज उठाई। मेरठ षड्यंत्र केस जैसे मुकदमों ने भी इन गतिविधियों को चर्चा में ला दिया। इस प्रकार वामपंथियों ने राष्ट्रीय आंदोलन में सामाजिक और आर्थिक प्रश्नों को मजबूत किया।
📚 Self Study Tip
अध्याय को याद करने के लिए घटनाओं को क्रम से पढ़ें—1917 चंपारण, 1919 रॉलेट एक्ट और जलियांवाला बाग, 1920 असहयोग, 1930 सविनय अवज्ञा, 1931 गांधी-इरविन समझौता, 1932 पूना पैक्ट और 1942 भारत छोड़ो आंदोलन। इसके बाद महत्वपूर्ण व्यक्तित्व और तिथियों को दोहराएँ।
अध्याय का सार
भारत में राष्ट्रवाद ने अलग-अलग क्षेत्रों, धर्मों और सामाजिक समूहों के लोगों को स्वतंत्रता के लिए एकजुट किया। गांधीजी के नेतृत्व में सत्याग्रह और अहिंसा के आधार पर कई जन आंदोलनों का विकास हुआ। चंपारण से भारत छोड़ो आंदोलन तक राष्ट्रीय संघर्ष लगातार मजबूत हुआ और अंततः 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
Comments
Post a Comment