History Chapter 2: Socialism and Communism | Bihar Board Class 10 Notes
अध्याय 2: समाजवाद एवं साम्यवाद
📖 इस अध्याय के बारे में
समाजवाद और साम्यवाद आधुनिक विश्व के महत्वपूर्ण राजनीतिक तथा आर्थिक विचार हैं। औद्योगिक क्रांति के बाद मजदूरों की कठिन परिस्थितियों और आर्थिक असमानता ने इन विचारों के विकास को बढ़ावा दिया।
इस अध्याय में हम समाजवाद, साम्यवाद, यूटोपियन समाजवाद, कार्ल मार्क्स के विचार, अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठनों तथा 1917 की रूसी और बोल्शेविक क्रांति को सरल भाषा में समझेंगे।
① समाजवाद
समाजवादी विचारधारा का विकास 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में हुआ। औद्योगिक क्रांति के कारण अमीर और गरीब के बीच अंतर बढ़ा तथा मजदूरों की स्थिति कठिन हुई। इसी परिस्थिति में मजदूरों के हितों और आर्थिक समानता के विचार मजबूत हुए।
② साम्यवाद
साम्यवाद की विचारधारा के विकास में कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा। साम्यवाद निजी संपत्ति की व्यवस्था को समाप्त करके समान समाज की स्थापना पर जोर देता है।
③ समाजवाद की उत्पत्ति
समाजवाद की उत्पत्ति 18वीं और 19वीं शताब्दी में यूरोप में हुई। औद्योगिक क्रांति से कारखानों का विकास हुआ, लेकिन मजदूरों की स्थिति कठिन बनी रही। उन्हें कम मजदूरी मिलती थी और काम की परिस्थितियाँ खराब थीं।
अमीर और गरीब के बीच बढ़ती असमानता को देखकर कई विचारकों ने ऐसी व्यवस्था की कल्पना की जिसमें मजदूरों को बेहतर जीवन, समान अवसर और सामाजिक न्याय मिल सके। इसी से समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा मिला।
④ यूटोपियन समाजवाद
यूटोपियन समाजवाद समाजवाद की प्रारंभिक विचारधारा थी। इसमें ऐसे आदर्श समाज की कल्पना की गई जहाँ लोग समानता और सहयोग के साथ रहें। इसके प्रमुख विचारक रॉबर्ट ओवेन, सेंट साइमन और चार्ल्स फूरिए थे।
रॉबर्ट ओवेन
रॉबर्ट ओवेन ब्रिटिश उद्योगपति और समाज सुधारक थे। उन्होंने स्कॉटलैंड के न्यू लैनार्क में मजदूरों को अच्छी मजदूरी और बेहतर सुविधाएँ दीं। उनके प्रयासों से यह विचार सामने आया कि संतुष्ट मजदूर अधिक अच्छा कार्य कर सकते हैं।
⑤ कार्ल मार्क्स और उनके विचार
कार्ल मार्क्स जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाजवादी विचारक थे। उनका जन्म 5 मई 1818 को ट्रायर में हुआ था। उन्हें वैज्ञानिक समाजवाद और साम्यवाद का प्रमुख विचारक माना जाता है।
मार्क्स ने फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ “द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो” 1848 में लिखा। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक “दास कैपिटल” 1867 में प्रकाशित हुई।
कार्ल मार्क्स के प्रमुख सिद्धांत
⑥ अंतरराष्ट्रीय मजदूर संगठन
प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ — 1864
प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना 1864 में लंदन में हुई। कार्ल मार्क्स इसके प्रमुख विचारकों में थे। इसका उद्देश्य विभिन्न देशों के मजदूर संगठनों को एकजुट करना और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना था। आंतरिक मतभेदों के कारण 1876 में यह समाप्त हो गया।
द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ — 1889
द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना 1889 में पेरिस में हुई। इसमें विभिन्न देशों के समाजवादी और श्रमिक दल शामिल हुए। इसका उद्देश्य समाजवादी विचारों का प्रसार और मजदूरों के अधिकारों की रक्षा करना था। 1 मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मान्यता देने में इसका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
⑦ 1917 की बोल्शेविक क्रांति
1917 की बोल्शेविक क्रांति रूस के इतिहास की महत्वपूर्ण घटना थी। इसका नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन और बोल्शेविक पार्टी ने किया। इस क्रांति के बाद रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना हुई।
बोल्शेविक क्रांति के प्रमुख कारण
⑧ फरवरी 1917 की रूसी क्रांति
फरवरी 1917 में पेट्रोग्राड में हड़ताल और प्रदर्शन हुए। मजदूरों, किसानों और सैनिकों ने ज़ार शासन का विरोध किया। अंततः ज़ार निकोलस द्वितीय को सिंहासन छोड़ना पड़ा।
इसके साथ लगभग 300 वर्ष पुराने रोमानोव वंश का शासन समाप्त हो गया। इसके बाद रूस में अंतरिम सरकार बनी।
⑨ अक्टूबर 1917 की बोल्शेविक क्रांति
अक्टूबर 1917 में बोल्शेविक पार्टी ने अंतरिम सरकार के विरुद्ध क्रांति की। इसका नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन ने किया। उन्होंने “रोटी, शांति और ज़मीन” का नारा दिया।
24–25 अक्टूबर 1917 को बोल्शेविकों ने पेट्रोग्राड के प्रमुख सरकारी भवनों और विंटर पैलेस पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद अंतरिम सरकार समाप्त हो गई और बोल्शेविक सरकार स्थापित हुई।
⑩ बोल्शेविक क्रांति के प्रमुख परिणाम
⑪ 📅 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण वर्ष
- 1818 — 5 मई — कार्ल मार्क्स का जन्म।
- 1848 — द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो का प्रकाशन।
- 1864 — प्रथम अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना।
- 1867 — दास कैपिटल का प्रकाशन।
- 1883 — कार्ल मार्क्स की मृत्यु।
- 1889 — द्वितीय अंतरराष्ट्रीय संघ की स्थापना।
- 1905 — 9 जनवरी — खूनी रविवार।
- 1914–18 — प्रथम विश्वयुद्ध।
- 1917 — फरवरी रूसी क्रांति और अक्टूबर बोल्शेविक क्रांति।
⑫ 👤 महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
- कार्ल मार्क्स — वैज्ञानिक समाजवाद और साम्यवाद के प्रमुख विचारक।
- फ्रेडरिक एंगेल्स — मार्क्स के सहयोगी और कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो के सह-लेखक।
- रॉबर्ट ओवेन — यूटोपियन समाजवादी और समाज सुधारक।
- सेंट साइमन — यूटोपियन समाजवाद के प्रमुख विचारक।
- चार्ल्स फूरिए — यूटोपियन समाजवाद के प्रमुख विचारक।
- व्लादिमीर लेनिन — बोल्शेविक क्रांति के प्रमुख नेता।
- ज़ार निकोलस द्वितीय — रूस के अंतिम ज़ार।
- एलेक्ज़ेंडर केरेंस्की — 1917 की अंतरिम सरकार के प्रमुख नेताओं में से एक।
⑬ 📢 महत्वपूर्ण नारे
- “प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसके कार्य के अनुसार” — समाजवादी सिद्धांत।
- “प्रत्येक से उसकी क्षमता के अनुसार, प्रत्येक को उसकी आवश्यकता के अनुसार” — साम्यवादी सिद्धांत।
- “रोटी, शांति और ज़मीन” — लेनिन का प्रसिद्ध नारा।
- “सारी सत्ता सोवियतों को” — बोल्शेविक पार्टी का प्रमुख नारा।
⑭ 📌 परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- समाजवाद का उद्देश्य आर्थिक असमानता कम करना और सामाजिक न्याय स्थापित करना है।
- साम्यवाद का लक्ष्य वर्गहीन और शोषणमुक्त समाज बनाना है।
- यूटोपियन समाजवाद के प्रमुख विचारक रॉबर्ट ओवेन, सेंट साइमन और चार्ल्स फूरिए थे।
- कार्ल मार्क्स ने वर्ग संघर्ष और ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांतों को विकसित किया।
- 1917 की बोल्शेविक क्रांति का नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन ने किया।
- बोल्शेविक क्रांति के बाद रूस में समाजवादी सरकार की स्थापना हुई।
- बड़े उद्योगों और बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
- किसानों में भूमि का वितरण किया गया।
- बोल्शेविक क्रांति ने विश्वभर के समाजवादी और मजदूर आंदोलनों को प्रेरणा दी।
⑮ 🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन
⑯ 🎯 अभ्यास प्रश्न
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
रूसी क्रांति के कई कारण थे। रूस में ज़ार निकोलस द्वितीय का निरंकुश शासन था। जनता को पर्याप्त राजनीतिक अधिकार नहीं मिले थे। किसानों की आर्थिक स्थिति खराब थी और मजदूरों को कम मजदूरी तथा खराब काम की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता था।
गैर-रूसी लोगों पर रूसीकरण की नीति से असंतोष बढ़ा। 1905 की क्रांति और खूनी रविवार ने भी जनता में विरोध की भावना पैदा की। मार्क्सवादी विचारों का प्रभाव बढ़ा। प्रथम विश्वयुद्ध ने आर्थिक संकट, भुखमरी और बेरोजगारी को और बढ़ा दिया। इन सभी कारणों से 1917 में रूस में क्रांति की स्थिति बन गई।
नई आर्थिक नीति, जिसे NEP कहा जाता है, लेनिन द्वारा 1921 में अपनाई गई आर्थिक नीति थी। इसका उद्देश्य रूसी अर्थव्यवस्था को सुधारना और उत्पादन बढ़ाना था।
इस नीति में किसानों को अपनी उपज का कुछ भाग बाजार में बेचने की अनुमति दी गई। छोटे व्यापार और छोटे उद्योगों में सीमित निजी गतिविधियों को भी अनुमति मिली। बड़े उद्योग, बैंक और प्रमुख संसाधन सरकार के नियंत्रण में रहे। इस प्रकार नई आर्थिक नीति ने अर्थव्यवस्था को कठिन परिस्थिति से बाहर निकालने में सहायता की।
रूसी क्रांति के बाद रूस में बोल्शेविक सरकार की स्थापना हुई। ज़ारशाही शासन समाप्त हो गया। किसानों को भूमि देने की नीति अपनाई गई और बड़े उद्योगों तथा बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया।
रूस प्रथम विश्वयुद्ध से बाहर निकल गया। मजदूरों और किसानों को राजनीतिक तथा आर्थिक व्यवस्था में अधिक महत्व मिला। इस क्रांति से विश्व के दूसरे देशों के समाजवादी और मजदूर आंदोलनों को भी प्रेरणा मिली। आगे चलकर रूस सोवियत संघ के रूप में एक शक्तिशाली समाजवादी राज्य बना।
कार्ल मार्क्स का जन्म 5 मई 1818 को ट्रायर में हुआ था। वे जर्मन दार्शनिक, अर्थशास्त्री और समाजवादी विचारक थे। उन्होंने फ्रेडरिक एंगेल्स के साथ 1848 में द कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो लिखा। दास कैपिटल उनकी प्रसिद्ध रचना है।
मार्क्स के अनुसार समाज का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। उन्होंने पूँजीपति और मजदूर वर्ग के बीच संघर्ष को महत्वपूर्ण माना। उन्होंने ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग संघर्ष और सर्वहारा क्रांति के विचारों को विकसित किया। उनका उद्देश्य वर्गहीन और शोषणमुक्त समाज की स्थापना था।
यूटोपियन समाजवाद समाजवाद की प्रारंभिक विचारधारा थी। इसके विचारक एक ऐसे आदर्श समाज की कल्पना करते थे जिसमें लोग समानता और सहयोग के साथ रहें। वे आर्थिक असमानता और मजदूरों की खराब स्थिति को दूर करना चाहते थे।
रॉबर्ट ओवेन, सेंट साइमन और चार्ल्स फूरिए इसके प्रमुख विचारक थे। रॉबर्ट ओवेन ने मजदूरों के लिए बेहतर मजदूरी और सुविधाओं का समर्थन किया। बाद में कार्ल मार्क्स ने समाजवाद को अधिक वैज्ञानिक आधार दिया और वैज्ञानिक समाजवाद के विचार को विकसित किया।
📚 Self Study Tip
इस अध्याय को याद करने के लिए पहले समाजवाद और साम्यवाद का अंतर समझें। फिर कार्ल मार्क्स, यूटोपियन समाजवाद और 1917 की रूसी क्रांति को क्रम से पढ़ें। अंत में महत्वपूर्ण वर्ष और अभ्यास प्रश्न दोहराएँ।
अध्याय का सार
समाजवाद और साम्यवाद का विकास आर्थिक असमानता तथा मजदूरों की कठिन परिस्थितियों के बीच हुआ। कार्ल मार्क्स ने समाजवादी विचारों को वैज्ञानिक आधार दिया। 1917 की रूसी और बोल्शेविक क्रांति ने इन विचारों को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बना दिया और विश्व के समाजवादी आंदोलनों को नई प्रेरणा मिली।
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