Geography Chapter 3: Manufacturing Industries | Bihar Board Class 10 Notes
इकाई 3: विनिर्माण उद्योग
1विनिर्माण उद्योग — परिचय एवं महत्व
| कच्चा माल | तैयार वस्तु |
|---|---|
| कपास | कपड़ा |
| गन्ना | चीनी |
| लौह-अयस्क | लोहा एवं इस्पात |
| लकड़ी | फर्नीचर |
विनिर्माण उद्योग का महत्व
2उद्योगों की स्थापना के प्रमुख कारक
भौतिक कारक
कच्चे माल की उपलब्धता, शक्ति के साधन, जल की उपलब्धता और उपयुक्त जलवायु उद्योगों की स्थापना को प्रभावित करते हैं।
मानवीय कारक
सस्ते और कुशल श्रमिक, बाजार, परिवहन सुविधा, पूँजी और सरकारी नीतियाँ उद्योगों के स्थान निर्धारण में महत्वपूर्ण हैं।
3उद्योगों का वर्गीकरण
4🧵 सूती वस्त्र उद्योग
सूती वस्त्र उद्योग भारत का प्रमुख उद्योग है और कृषि के बाद बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करता है।
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| पहली आधुनिक सूती मिल | 1818 ई., फोर्ट ग्लास्टर |
| पहली सफल सूती मिल | 1854 ई., मुंबई |
| प्रमुख केंद्र | मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, कोयंबटूर, कानपुर और कोलकाता |
5🌿 जूट उद्योग
जूट को “सुनहरा रेशा” कहा जाता है। भारत जूट उत्पादन में विश्व के प्रमुख देशों में है।
6🍬 चीनी उद्योग
भारत में गन्ने से चीनी, गुड़ और खाँडसारी का उत्पादन किया जाता है।
| तथ्य | जानकारी |
|---|---|
| आधुनिक चीनी उद्योग का विकास | 1903 ई., बिहार के सारण जिले में |
| अग्रणी राज्य | महाराष्ट्र |
| उत्तर भारत का प्रमुख राज्य | उत्तर प्रदेश |
दक्षिण भारत की ओर उद्योग के जाने के कारण
अनुकूल जलवायु, गन्ने में अधिक रस और मिठास, सहकारी समितियों का विकास तथा बंदरगाहों से निर्यात की सुविधा।
7⚙️ लौह-इस्पात उद्योग
लौह-इस्पात उद्योग को “सभी उद्योगों की रीढ़” कहा जाता है। यह एक आधारभूत उद्योग है।
| केंद्र/संस्था | महत्वपूर्ण तथ्य |
|---|---|
| कुल्टी | पहला आधुनिक लोहा कारखाना — 1874 ई. |
| जमशेदपुर | TISCO की स्थापना — 1907 ई., साकची |
| बर्नपुर | IISCO |
| भद्रावती | विश्वेश्वरैया लोहा एवं इस्पात |
| भिलाई | छत्तीसगढ़ |
| राउरकेला | ओडिशा |
| दुर्गापुर | पश्चिम बंगाल |
| बोकारो | झारखंड |
8🔩 अन्य धातु उद्योग
एल्युमिनियम उद्योग
एल्युमिनियम हल्की, जंगरोधी और विद्युत की अच्छी सुचालक धातु है। इसका उपयोग हवाई जहाज, बर्तन और बिजली के तारों में होता है। प्रमुख क्षेत्र—ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र।
ताँबा उद्योग
ताँबे का उपयोग बिजली के तार तथा पीतल, काँसा आदि बनाने में किया जाता है। पहला ताँबा संयंत्र घाटशिला, झारखंड में बताया गया है। प्रमुख केंद्र—घाटशिला, खेतड़ी और तूतीकोरिन।
उर्वरक उद्योग
पहला उर्वरक संयंत्र 1906 ई. में रानीपेट में तथा पहला बड़ा संयंत्र 1951–52 ई. में सिंदरी में बताया गया है। भारत नाइट्रोजन उर्वरक के प्रमुख उत्पादकों में शामिल है।
9🧪 रासायनिक उद्योग
रासायनिक उद्योग में कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों प्रकार के रसायन बनाए जाते हैं।
10🏗️ सीमेंट उद्योग
सीमेंट उद्योग का मुख्य कच्चा माल चूना पत्थर है। इसके अलावा सिलिका, जिप्सम और कोयले का भी उपयोग होता है।
11🚆 तैयार माल आधारित एवं परिवहन उद्योग
रेलवे उद्योग
वायुयान एवं पोत निर्माण
वायुयान उद्योग: बेंगलुरु, कानपुर, नासिक और हैदराबाद।
पोत निर्माण: विशाखापत्तनम, मुंबई, कोच्चि और कोलकाता।
12💻 सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योग
उत्पाद: कंप्यूटर, टेलीफोन, टेलीविजन, राडार, लेजर और सॉफ्टवेयर।
प्रमुख केंद्र: बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई।
फुटलूज उद्योग
ऐसे उद्योग जिन्हें कच्चे माल के स्रोत से विशेष रूप से बँधे बिना विभिन्न स्थानों पर स्थापित किया जा सकता है, फुटलूज उद्योग कहलाते हैं। उदाहरण—कंप्यूटर, टेलीफोन, टेलीविजन, होजियरी और खिलौना उद्योग।
13🌍 वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण — LPG
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| उदारीकरण | उद्योग और व्यापार को अनावश्यक सरकारी नियंत्रणों से मुक्त करना। |
| निजीकरण | सरकारी उद्योगों का स्वामित्व या संचालन निजी क्षेत्र को देना। |
| वैश्वीकरण | देश की अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ना। |
| बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) | ऐसी कंपनी जो अनेक देशों में अपना व्यवसाय करती है। |
वैश्वीकरण के प्रभाव
14🌱 औद्योगिक प्रदूषण एवं नियंत्रण
उद्योगों से निकलने वाले धुएँ, गंदे जल, कचरे और शोर के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता है।
| प्रदूषण | मुख्य कारण |
|---|---|
| वायु प्रदूषण | जहरीली गैसों और धुएँ से |
| जल प्रदूषण | औद्योगिक अपशिष्ट जल से |
| ध्वनि प्रदूषण | मशीनों के तेज शोर से |
| भूमि प्रदूषण | औद्योगिक ठोस कचरे से |
भोपाल गैस त्रासदी
प्रदूषण नियंत्रण के उपाय
ऊँची चिमनियों और प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का प्रयोग, औद्योगिक अपशिष्ट जल का शोधन, मशीनों में साइलेंसर, ठोस कचरे का उचित निपटान, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग तथा श्रमिकों के लिए सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना प्रमुख उपाय हैं।
15🎯 परीक्षा अभ्यास
एक समय में केवल एक उत्तर खुलेगा। उत्तर छिपाने के लिए उसी प्रश्न पर दोबारा क्लिक करें।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न — वस्तुनिष्ठ प्रश्नों पर आधारित
लघु उत्तरीय प्रश्न — उत्तर सहित
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
उदारीकरण का अर्थ उद्योग और व्यापार को अनावश्यक सरकारी नियंत्रणों से मुक्त करना, निजीकरण का अर्थ सरकारी उद्योगों के स्वामित्व या संचालन में निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाना और वैश्वीकरण का अर्थ भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इससे विदेशी निवेश और तकनीक में वृद्धि, IT तथा सेवा क्षेत्र का विस्तार और नए बाजारों की उपलब्धता हुई। दूसरी ओर छोटे और कुटीर उद्योगों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव भी बढ़ा।
सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को ज्ञान आधारित उद्योग कहा जाता है। बेंगलुरु को सिलिकॉन सिटी कहा जाता है। कंप्यूटर, टेलीफोन, टेलीविजन, राडार, लेजर और सॉफ्टवेयर इसके प्रमुख उत्पाद हैं। बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई इसके प्रमुख केंद्र हैं।
भारत में पहली आधुनिक सूती मिल 1818 ई. में फोर्ट ग्लास्टर और पहली सफल सूती मिल 1854 ई. में मुंबई में स्थापित हुई। मुंबई में कपास उत्पादक क्षेत्रों की निकटता, बंदरगाह, पूँजी और नम जलवायु के कारण उद्योग का विकास हुआ। मुंबई, अहमदाबाद, सूरत, कोयंबटूर, कानपुर और कोलकाता प्रमुख केंद्र हैं।
लौह-इस्पात उद्योग आधारभूत उद्योग है और इसे सभी उद्योगों की रीढ़ कहा जाता है। पहला आधुनिक लोहा कारखाना 1874 ई. में कुल्टी में तथा TISCO की स्थापना 1907 ई. में साकची, जमशेदपुर में हुई। जमशेदपुर, बर्नपुर, भद्रावती, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर और बोकारो इसके प्रमुख केंद्र हैं।
औद्योगिक प्रदूषण मुख्यतः वायु, जल, ध्वनि और भूमि प्रदूषण के रूप में होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का उपयोग, अपशिष्ट जल का शोधन, मशीनों में साइलेंसर, ठोस कचरे का उचित निपटान, स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और श्रमिक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था आवश्यक है।
कारण बताइए
📚 Self Study Tip
इस इकाई को पाँच चरणों में पढ़ें—(1) विनिर्माण और अवस्थिति के कारक, (2) उद्योगों का वर्गीकरण, (3) सूती-जूट-चीनी-लौह-इस्पात जैसे प्रमुख उद्योग, (4) IT, LPG और वैश्वीकरण, (5) औद्योगिक प्रदूषण। परीक्षा के लिए उद्योग–स्थान–वर्ष वाली तालिका को बार-बार दोहराएँ।
इकाई का सार
विनिर्माण उद्योग कच्चे माल को उपयोगी और अधिक मूल्यवान वस्तुओं में बदलकर आर्थिक विकास, रोजगार और निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उद्योगों का स्थान कच्चे माल, ऊर्जा, जल, श्रम, बाजार, परिवहन और पूँजी जैसे अनेक कारकों से प्रभावित होता है। भारत में सूती वस्त्र, जूट, चीनी, लौह-इस्पात, रासायनिक, सीमेंट और IT जैसे उद्योगों का विशेष महत्व है। वैश्वीकरण ने उद्योगों के लिए अवसरों के साथ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ाई है। औद्योगिक विकास के साथ प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण भी आवश्यक है।
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