Geography Chapter 2: Agriculture | Bihar Board Class 10 Notes
इकाई 2: कृषि
1कृषि — परिचय एवं महत्व
भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ की लगभग दो-तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। देश की राष्ट्रीय आय में भी कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है।
कृषि का महत्व
| कृषि उत्पाद | प्रमुख कृषि आधारित उद्योग |
|---|---|
| कपास | सूती वस्त्र उद्योग |
| गन्ना | चीनी उद्योग |
| जूट | बोरा एवं रस्सी उद्योग |
2कृषि भूमि का उपयोग
कृषि योग्य भूमि का उपयोग मुख्यतः शुद्ध बोए गए क्षेत्र, चालू परती भूमि, अन्य परती भूमि तथा कृषि योग्य व्यर्थ भूमि के रूप में किया जाता है।
| भूमि उपयोग | प्रतिशत |
|---|---|
| शुद्ध बोया गया क्षेत्र | 43.41% |
| चालू परती भूमि | 7.03% |
| अन्य परती भूमि | 3.82% |
| कृषि योग्य व्यर्थ भूमि | 4.41% |
3शस्य गहनता
जनसंख्या वृद्धि और कृषि भूमि में कमी के कारण कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए शस्य गहनता महत्वपूर्ण है।
शस्य गहनता को प्रभावित करने वाले कारक
सिंचाई, उर्वरक, उन्नत बीज, मशीनों का उपयोग, कीटनाशक तथा फसल का उचित मूल्य।
4कृषि के प्रकार
5भारत की प्रमुख फसल ऋतुएँ
कटाई: अप्रैल–जून
फसलें: गेहूँ, जौ, चना, मटर, मसूर, सरसों।
कटाई: सितंबर–अक्टूबर
फसलें: धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, मूँगफली, जूट, कपास, सोयाबीन, अरहर।
कटाई: मई–जून
फसलें: तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, कद्दू, मक्का और सब्जियाँ।
6🍚 प्रमुख खाद्य फसलें
चावल (धान)
चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल है। भारत विश्व में चावल के प्रमुख उत्पादक देशों में शामिल है।
प्रमुख फसलें: अमन, औस और बोरो।
गेहूँ
गेहूँ भारत की दूसरी महत्वपूर्ण खाद्य फसल और प्रमुख रबी फसल है।
प्रमुख राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान।
मक्का
मक्का मनुष्य के भोजन तथा पशुओं के चारे दोनों के रूप में उपयोगी है। तापमान 21°C–27°C और वर्षा 50–100 सेमी उपयुक्त मानी गई है। प्रमुख उत्पादक—बिहार, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक।
मोटे अनाज
ज्वार: महाराष्ट्र प्रमुख उत्पादक। बाजरा: गुजरात और राजस्थान। रागी: कर्नाटक।
दलहन
दलहन मानव शरीर को प्रोटीन प्रदान करते हैं। प्रमुख दलहन—अरहर, उड़द, मूँग, मसूर, मटर और चना। खरीफ: अरहर, मूँग, उड़द। रबी: चना, मटर, मसूर। राष्ट्रीय दाल विकास कार्यक्रम 1986–87 में शुरू किया गया।
7🌻 तिलहन
तिलहन से खाद्य तेल प्राप्त किया जाता है। प्रमुख तिलहन—मूँगफली, सरसों, नारियल, तिल, सोयाबीन और सूरजमुखी।
| फसल | प्रमुख उत्पादक क्षेत्र/राज्य |
|---|---|
| मूँगफली | गुजरात और आंध्र प्रदेश |
| सरसों | राजस्थान |
| सोयाबीन | मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र |
8☕ पेय फसलें
चाय
चाय एक प्रमुख रोपण कृषि की फसल है। इसके लिए 20°C–30°C तापमान, 150 सेमी से अधिक वर्षा, ढालू भूमि तथा अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी उपयुक्त है। प्रमुख क्षेत्र—असम की ब्रह्मपुत्र घाटी, दार्जिलिंग, नीलगिरि पहाड़ियाँ और केरल। दार्जिलिंग की चाय अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है।
कॉफी
कॉफी एक झाड़ी के फलों के बीजों से प्राप्त होती है। इसकी प्रमुख किस्में अरेबिका, लिबेरिका और रोबस्टा हैं। भारत में कॉफी का प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक है।
9🧵 रेशेदार फसलें
कपास
कपास सूती वस्त्र उद्योग के लिए प्रमुख कच्चा माल है। यह मुख्यतः दक्कन की काली मिट्टी में अच्छी होती है। तापमान लगभग 21°C, वर्षा लगभग 100 सेमी और गहरी काली मिट्टी इसके लिए अनुकूल हैं। प्रमुख राज्य—महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और पंजाब।
जूट
जूट को “सुनहरा रेशा” कहा जाता है। इससे रस्सी, चटाई और बोरे बनाए जाते हैं। 20°C–30°C तापमान, 200 सेमी से अधिक वर्षा और जलोढ़ दोमट मिट्टी अनुकूल हैं। प्रमुख राज्य—पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और मेघालय।
10🍊 बागबानी एवं रबर
फल, सब्जियाँ, औषधीय पौधे और मसाले आदि बागबानी फसलें कहलाती हैं। भारत में विभिन्न प्रकार के फलों, सब्जियों और मसालों का उत्पादन किया जाता है। भारत काजू के प्रमुख निर्यातक देशों में शामिल है।
रबर: रबर एक प्रमुख बागानी फसल है। भारत में इसकी खेती केरल और अन्य उष्ण एवं आर्द्र क्षेत्रों में की जाती है। प्रमुख उत्पादक राज्य—केरल।
11📉 भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता
भारतीय कृषि की निम्न उत्पादकता के प्रमुख कारण हैं—जनसंख्या का दबाव, छोटे खेत, मानसून पर निर्भरता, सिंचाई की कमी, आधुनिक तकनीक का कम उपयोग, उचित मूल्य का अभाव और कम पूँजी निवेश।
12🌱 हरित क्रांति
1960 के दशक में उन्नत बीज, रासायनिक खाद, सिंचाई और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से कृषि उत्पादन में हुई तेज वृद्धि को हरित क्रांति कहा जाता है।
13🌍 भूमंडलीकरण और भारतीय कृषि
भूमंडलीकरण का अर्थ है भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था से जोड़ना। 1990 के बाद उदारीकरण और भूमंडलीकरण की नीतियों से कृषि में नई तकनीकों और विश्व बाजार की भूमिका बढ़ी।
14🍚 खाद्य सुरक्षा और कृषि-पशुपालन
गरीबी और भुखमरी से निपटने के लिए सरकार ने खाद्य सुरक्षा प्रणाली विकसित की है। इसके दो प्रमुख अंग हैं—
कृषि के साथ पशुपालन, मछली पालन और वानिकी भी प्राथमिक क्रियाओं का हिस्सा हैं। भारत में विशाल पशुधन पाया जाता है। पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आय का महत्वपूर्ण आधार है।
📌 महत्वपूर्ण परिभाषाएँ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| शस्य गहनता | एक ही भूमि पर एक वर्ष में एक से अधिक बार फसल उगाना। |
| हरित क्रांति | उन्नत बीज, खाद, सिंचाई और आधुनिक तकनीक से कृषि उत्पादन में हुई तेज वृद्धि। |
| रोपण कृषि | बड़े बागानों में मुख्यतः एक ही फसल की व्यापारिक खेती। |
| स्थानांतरी कृषि | एक स्थान पर कुछ समय खेती करने के बाद दूसरी जगह जाकर खेती करना। |
| बफर स्टॉक | सरकार द्वारा भविष्य की आवश्यकता के लिए रखा गया खाद्यान्न भंडार। |
| नकदी फसल | बाजार में बेचकर आय प्राप्त करने के उद्देश्य से उगाई जाने वाली फसल। |
15🎯 परीक्षा अभ्यास
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
लघु उत्तरीय प्रश्न
कारण बताइए
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
भारत में मुख्यतः रबी, खरीफ और जायद तीन फसल ऋतुएँ हैं। रबी फसलें सामान्यतः अक्टूबर से दिसंबर में बोई और अप्रैल से जून में काटी जाती हैं; गेहूँ, जौ, चना, मटर और सरसों प्रमुख हैं। खरीफ फसलें जून से जुलाई में बोई और सितंबर से अक्टूबर में काटी जाती हैं; धान, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, जूट और सोयाबीन प्रमुख हैं। जायद फसलें रबी और खरीफ के बीच मार्च-अप्रैल में बोई जाती हैं; तरबूज, खरबूज, खीरा और सब्जियाँ प्रमुख हैं।
भारतीय कृषि में छोटे और बिखरे खेत, बढ़ती जनसंख्या का दबाव, मानसून पर निर्भरता, सिंचाई की कमी, आधुनिक तकनीक का सीमित उपयोग, किसानों के पास कम पूँजी तथा कई बार उपज का उचित मूल्य न मिलना उत्पादकता को प्रभावित करते हैं। सिंचाई, उन्नत बीज, मशीनरी, वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों और उचित बाजार व्यवस्था के विस्तार से उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है।
हरित क्रांति ने उन्नत बीजों, सिंचाई, उर्वरकों और कृषि मशीनों के प्रयोग को बढ़ावा दिया। इससे विशेष रूप से गेहूँ के उत्पादन में तेज वृद्धि हुई और भारत की खाद्य सुरक्षा मजबूत हुई। इसके प्रभाव को पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में विशेष रूप से देखा गया।
बफर स्टॉक के माध्यम से सरकार भविष्य की आवश्यकता और आपात परिस्थितियों के लिए खाद्यान्न सुरक्षित रखती है। जन वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन की दुकानों पर आवश्यक खाद्यान्न अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध कराया जाता है। दोनों मिलकर गरीब और जरूरतमंद लोगों तक खाद्यान्न पहुँचाने में सहायता करते हैं।
चावल के लिए गर्म जलवायु, पर्याप्त वर्षा और चिकनी दोमट मिट्टी उपयुक्त है; पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्य हैं। गेहूँ के लिए ठंडी बुआई अवधि और मध्यम वर्षा उपयुक्त है; पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान प्रमुख हैं। चाय के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु तथा अच्छी जल निकासी वाली ढालू भूमि उपयुक्त है; असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि और केरल प्रमुख क्षेत्र हैं। कपास के लिए दक्कन की काली मिट्टी अनुकूल है; महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और पंजाब प्रमुख हैं। जूट के लिए गर्म-आर्द्र जलवायु और जलोढ़ मिट्टी उपयुक्त है; पश्चिम बंगाल, बिहार, असम, ओडिशा और मेघालय प्रमुख हैं।
📚 Self Study Tip
इस इकाई को पाँच चरणों में दोहराएँ—(1) कृषि और उसके प्रकार, (2) रबी-खरीफ-जायद, (3) प्रमुख फसलें और उत्पादक राज्य, (4) कृषि की समस्याएँ और हरित क्रांति, (5) भूमंडलीकरण और खाद्य सुरक्षा। पहले तालिकाएँ याद करें, फिर अभ्यास प्रश्न बिना उत्तर देखे हल करें।
इकाई का सार
कृषि भारत की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। भारत में विभिन्न जलवायु और मिट्टी के कारण अनेक प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। रबी, खरीफ और जायद फसल ऋतुओं के साथ खाद्य, दलहन, तिलहन, पेय, रेशेदार और बागबानी फसलों का विशेष महत्व है। कृषि की निम्न उत्पादकता को दूर करने में सिंचाई, आधुनिक तकनीक और हरित क्रांति की भूमिका रही है। खाद्य सुरक्षा के लिए बफर स्टॉक और जन वितरण प्रणाली महत्वपूर्ण हैं।
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