Economics Chapter 7: Consumer Awareness and Protection | Bihar Board Class 10 Notes
🛒 अध्याय 7 : उपभोक्ता जागरण एवं संरक्षण
📖 अध्याय का परिचय
इस अध्याय में उपभोक्ता की अवधारणा, बाजार में उपभोक्ता के शोषण, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986, उपभोक्ता के अधिकार, शिकायत निवारण व्यवस्था तथा सामान खरीदते समय आवश्यक सावधानियों का अध्ययन किया गया है।
1. उपभोक्ता का परिचय
जब कोई व्यक्ति अपने उपयोग के लिए बाजार से कोई वस्तु या सेवा खरीदता है, तो वह उपभोक्ता कहलाता है।
उदाहरण: जब कोई व्यक्ति दुकान से बिस्कुट खरीदता है, डॉक्टर से इलाज करवाता है या बस में यात्रा करता है, तो वह उपभोक्ता कहलाता है।
आज बाजार में अनेक प्रकार के विज्ञापन उपभोक्ताओं को वस्तुएँ खरीदने के लिए आकर्षित करते हैं। कई बार आकर्षक विज्ञापनों के पीछे खराब गुणवत्ता या नकली सामान भी बेचा जाता है। इसलिए उपभोक्ता का जागरूक होना आवश्यक है।
2. बाजार में उपभोक्ता का शोषण
उत्पादक और विक्रेता अधिक लाभ कमाने के लिए कई तरीकों से उपभोक्ताओं का शोषण कर सकते हैं।
① माप-तौल में कमी: सामान को निर्धारित मात्रा से कम देना। उदाहरण: एक किलो चीनी के स्थान पर केवल 900 ग्राम चीनी देना।
② खराब गुणवत्ता: अच्छी गुणवत्ता का वादा करके खराब या घटिया सामान देना।
③ मिलावट: असली वस्तु में सस्ती या हानिकारक वस्तु मिला देना। उदाहरण: मसालों में लकड़ी का बुरादा या घी में वनस्पति तेल मिलाना।
④ अधिक मूल्य वसूलना: पैकेट पर लिखे अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत लेना।
⑤ नकली वस्तुएँ: असली ब्रांड के नाम पर नकली सामान बेचना।
⑥ अधूरी या गलत जानकारी देना: उत्पाद के गुणों के बारे में गलत या झूठे दावे करना।
⑦ खराब सेवाएँ: पैसे लेने के बाद भी खराब या अधूरी सेवा प्रदान करना।
3. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 (COPRA)
उपभोक्ताओं को बाजार में होने वाले शोषण से बचाने के लिए भारत सरकार ने 1986 में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम बनाया। इसे संक्षेप में COPRA कहा जाता है।
इस कानून के माध्यम से उपभोक्ताओं को खराब वस्तुओं और सेवाओं के विरुद्ध शिकायत करने तथा मुआवजा प्राप्त करने का अधिकार दिया गया।
4. उपभोक्ता के अधिकार
उपभोक्ताओं को निम्नलिखित छह प्रमुख अधिकार प्राप्त हैं।
① सुरक्षा का अधिकार (Right to Safety): उपभोक्ता को ऐसी वस्तुओं से सुरक्षा पाने का अधिकार है जो उसके स्वास्थ्य और जीवन के लिए खतरनाक हो सकती हैं।
② सूचना पाने का अधिकार (Right to Information): उपभोक्ता को वस्तु या सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता और मूल्य के बारे में सही जानकारी पाने का अधिकार है।
③ चुनने का अधिकार (Right to Choose): उपभोक्ता को अपनी पसंद की वस्तु या सेवा चुनने का अधिकार है।
④ सुनवाई का अधिकार (Right to be Heard): उपभोक्ता को अपनी शिकायत रखने और उसकी सुनवाई कराने का अधिकार है।
⑤ शिकायत निवारण या क्षतिपूर्ति का अधिकार (Right to Seek Redressal): खराब वस्तु या सेवा के कारण नुकसान होने पर उपभोक्ता को नुकसान की भरपाई करवाने का अधिकार है।
⑥ उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार (Right to Consumer Education): हर उपभोक्ता को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी पाने का अधिकार है।
उदाहरण: “जागो ग्राहक जागो” जैसे अभियानों के माध्यम से उपभोक्ताओं को जागरूक किया जाता है।
5. शिकायत कहाँ और कैसे करें?
त्रि-स्तरीय शिकायत निवारण व्यवस्था
① जिला मंच (District Forum): यह जिला स्तर पर कार्य करता है। स्रोत के अनुसार यहाँ 20 लाख रुपये तक के दावों की सुनवाई होती है।
② राज्य आयोग (State Commission): यह राज्य स्तर पर कार्य करता है। स्रोत के अनुसार यहाँ 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के दावों की सुनवाई होती है।
③ राष्ट्रीय आयोग (National Commission): यह राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है। स्रोत के अनुसार यहाँ 1 करोड़ रुपये से अधिक के दावों की सुनवाई होती है।
शिकायत कैसे करें: उपभोक्ता सादे कागज पर शिकायत लिखकर आवश्यक रसीदों और दस्तावेजों के साथ उपभोक्ता अदालत में जमा कर सकता है। इसके लिए वकील की आवश्यकता नहीं होती।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन: टोल-फ्री नंबर 1800-11-4000 पर सलाह या जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
6. सामान खरीदते समय क्या देखें?
① रसीद (Bill/Cash Memo) अवश्य लें: रसीद खरीद का प्रमाण होती है और शिकायत करने के लिए उपयोगी होती है।
② गुणवत्ता चिह्न देखें
ISI मार्क: औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं, जैसे बिजली के उपकरण, हेलमेट और LPG सिलेंडर आदि की गुणवत्ता से संबंधित चिह्न।
एगमार्क (Agmark): कृषि उत्पादों, जैसे घी, तेल और मसालों की शुद्धता से संबंधित चिह्न।
हॉलमार्क (Hallmark): सोने के आभूषणों की शुद्धता को प्रमाणित करने वाला चिह्न।
③ समाप्ति की तारीख (Expiry Date) जाँचें: दवाइयाँ और खाद्य पदार्थ खरीदते समय हमेशा उनकी समाप्ति की तारीख जाँचनी चाहिए।
📌 परीक्षा सारांश
• अपने उपयोग के लिए वस्तु या सेवा खरीदने वाला व्यक्ति उपभोक्ता कहलाता है।
• माप-तौल में कमी, मिलावट, नकली वस्तु और अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता शोषण के उदाहरण हैं।
• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 में बनाया गया था।
• उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को COPRA कहा जाता है।
• उपभोक्ता के छह प्रमुख अधिकार हैं।
• सुरक्षा का अधिकार उपभोक्ता को खतरनाक वस्तुओं से सुरक्षा प्रदान करता है।
• सूचना पाने का अधिकार वस्तु या सेवा से संबंधित सही जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
• चुनने का अधिकार उपभोक्ता को अपनी पसंद की वस्तु या सेवा चुनने की स्वतंत्रता देता है।
• सुनवाई का अधिकार उपभोक्ता को अपनी शिकायत रखने का अधिकार देता है।
• शिकायत निवारण का अधिकार नुकसान की भरपाई प्राप्त करने से संबंधित है।
• उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार उपभोक्ता को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाता है।
• खरीदारी के समय बिल या कैश मेमो अवश्य लेना चाहिए।
• ISI मार्क औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं की गुणवत्ता से संबंधित है।
• एगमार्क कृषि उत्पादों की शुद्धता से संबंधित है।
• हॉलमार्क सोने के आभूषणों की शुद्धता से संबंधित है।
• दवाइयाँ और खाद्य पदार्थ खरीदते समय Expiry Date अवश्य देखनी चाहिए।
• जागरूक उपभोक्ता अपने अधिकारों का उपयोग करके शोषण से बच सकता है।
🎯 प्रश्नावली — सभी प्रश्नोत्तर
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कुल 21 प्रश्न-ब्लॉक
I. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
II. लघु उत्तरीय प्रश्न
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन
उपभोक्ता जागरूकता का उद्देश्य बाजार में उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में सहायता करना है। उपभोक्ता को सुरक्षा, सूचना, चुनाव, सुनवाई, शिकायत निवारण और उपभोक्ता शिक्षा जैसे अधिकार प्राप्त हैं। खरीदारी के समय बिल, MRP, गुणवत्ता चिह्न और समाप्ति की तारीख की जाँच करना महत्वपूर्ण है।
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