Economics Chapter 6: Globalization | Bihar Board Class 10 Notes
🌐 अध्याय 6 : वैश्वीकरण
📖 अध्याय का परिचय
इस अध्याय में वैश्वीकरण की अवधारणा, बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, वैश्वीकरण के मुख्य अंग, विदेशी निवेश, भारत की नई आर्थिक नीति 1991, वैश्वीकरण के सकारात्मक एवं नकारात्मक प्रभाव, आम आदमी, WTO और समावेशी विकास का अध्ययन किया गया है।
1. वैश्वीकरण का परिचय
वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़ जाती हैं। इसमें एक देश से दूसरे देश के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और लोगों का प्रवाह होता है। सरल शब्दों में, वैश्वीकरण का अर्थ है अपने देश की अर्थव्यवस्था को दुनिया की अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना।
उदाहरण: आज भारत में बैठकर अमेरिका में बनी जींस, कोरिया में बना मोबाइल फोन और जापानी कंपनी की कार का उपयोग किया जा सकता है। यह वैश्वीकरण का उदाहरण है।
2. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ (Multinational Companies - MNCs)
बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
परिभाषा: बहुराष्ट्रीय कंपनी वह कंपनी है जो एक से अधिक देशों में उत्पादन करती है और अपने सामान को दुनिया भर में बेचती है।
कार्यप्रणाली
ये कंपनियाँ उन स्थानों पर अपनी फैक्ट्रियाँ और कार्यालय स्थापित करती हैं जहाँ उन्हें सस्ता श्रम, कच्चा माल और बड़ा बाजार मिलता है। इससे उनकी उत्पादन लागत कम होती है और मुनाफा बढ़ता है।
उदाहरण: कोका-कोला, नाइकी, फोर्ड मोटर्स, सैमसंग और हुंडई जैसी कंपनियाँ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उदाहरण हैं।
आउटसोर्सिंग (Outsourcing)
जब कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने कुछ कार्य, जैसे ग्राहक सेवा या रिकॉर्ड-कीपिंग, किसी दूसरी बाहरी कंपनी से करवाती है, तो इसे आउटसोर्सिंग कहते हैं। भारत आउटसोर्सिंग का एक बड़ा केंद्र है।
3. वैश्वीकरण के मुख्य अंग
① व्यापार और व्यवसाय संबंधी बाधाओं को कम करना: देशों के बीच आयात-निर्यात पर लगने वाले टैक्स और अन्य प्रतिबंधों को कम करना या हटाना, ताकि वस्तुओं का आवागमन आसानी से हो सके।
② पूँजी का स्वतंत्र प्रवाह: एक देश की पूँजी दूसरे देश में निवेश के लिए आसानी से आ-जा सके।
③ प्रौद्योगिकी का स्वतंत्र प्रवाह: नई तकनीक, मशीनें और उत्पादन के तरीके एक देश से दूसरे देश तक आसानी से पहुँच सकें।
④ श्रम का स्वतंत्र प्रवाह: कुशल और अकुशल श्रमिक काम के लिए एक देश से दूसरे देश में आसानी से आ-जा सकें।
4. विदेशी निवेश (Foreign Investment)
जब कोई विदेशी कंपनी किसी दूसरे देश में पैसा लगाती है, तो उसे विदेशी निवेश कहते हैं।
उदाहरण: जब अमेरिकी कंपनी फोर्ड मोटर्स ने भारत के चेन्नई शहर के पास कार फैक्ट्री स्थापित करने के लिए निवेश किया, तो यह भारत में विदेशी निवेश का उदाहरण था।
विदेशी निवेश केवल पूँजी ही नहीं लाता, बल्कि नई तकनीक और प्रबंधन के तरीकों को भी बढ़ावा देता है।
5. भारत में वैश्वीकरण और नई आर्थिक नीति (1991)
1991 में भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था को संकट से निकालने के लिए नई आर्थिक नीति अपनाई, जिसे LPG सुधार भी कहा जाता है।
L – Liberalisation (उदारीकरण): व्यापार पर लगे अनावश्यक प्रतिबंधों और नियंत्रणों को हटाना ताकि कंपनियाँ आसानी से काम कर सकें।
P – Privatisation (निजीकरण): सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में बेचना या उनमें सरकारी हिस्सेदारी कम करना।
G – Globalisation (वैश्वीकरण): भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व अर्थव्यवस्था के लिए खोलना ताकि विदेशी कंपनियाँ भारत में आ सकें और भारतीय कंपनियाँ दुनिया में व्यापार कर सकें।
6. भारत पर वैश्वीकरण का प्रभाव
सकारात्मक प्रभाव (Positive Impact)
① प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में वृद्धि: विदेशी कंपनियों ने भारत में निवेश किया, जिससे नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा मिला।
② विश्वस्तरीय उपभोक्ता वस्तुओं की उपलब्धता: भारतीय बाजारों में दुनिया के विभिन्न ब्रांडों के मोबाइल, गाड़ियाँ और इलेक्ट्रॉनिक सामान उपलब्ध होने लगे।
③ नई प्रौद्योगिकी का आगमन: विदेशी कंपनियों के आने से भारत में उत्पादन की नई और उन्नत तकनीक का उपयोग बढ़ा।
④ प्रतिस्पर्धा बढ़ना और गुणवत्ता में सुधार: कई कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ने से बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद उपलब्ध होने लगे।
⑤ निर्यात में वृद्धि: भारतीय कंपनियों को विदेशों में अपने सामान बेचने के अवसर मिले, जिससे देश की आय बढ़ी।
⑥ रोजगार के नए अवसर: कॉल सेंटर, IT सेक्टर और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए।
नकारात्मक प्रभाव (Negative Impact)
① कुटीर और लघु उद्योगों पर बुरा प्रभाव: बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सस्ते और बेहतर उत्पादों के सामने कई छोटे और स्थानीय उद्योगों को कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा।
② कृषि क्षेत्र की उपेक्षा: वैश्वीकरण का अधिक लाभ सेवा क्षेत्र को मिला, जबकि कृषि क्षेत्र अपेक्षाकृत पिछड़ गया।
③ रोजगार पर प्रतिकूल प्रभाव: नए रोजगार पैदा होने के साथ-साथ कई पारंपरिक उद्योगों के बंद होने से रोजगार के अवसर भी कम हुए।
④ आधारिक संरचना की कमी: बिजली, सड़क और पानी जैसी सुविधाओं की कमी के कारण विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश करने से हिचक सकती हैं।
7. वैश्वीकरण और आम आदमी
फायदे
आम आदमी के पास खरीदारी के लिए पहले की तुलना में अधिक विकल्प उपलब्ध हैं। बेहतर गुणवत्ता वाली वस्तुएँ कम कीमत पर मिलने की संभावना बढ़ी है।
चुनौतियाँ
वैश्वीकरण के कारण श्रमिकों, विशेषकर अकुशल श्रमिकों के जीवन में अनिश्चितता बढ़ी है। उन्हें कम मजदूरी और नौकरी की कम सुरक्षा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
8. विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organisation - WTO)
विश्व व्यापार संगठन एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जो देशों के बीच व्यापार के नियमों को तय करने और व्यापार को बिना भेदभाव के बढ़ावा देने का कार्य करता है। इसकी स्थापना 1995 में हुई थी। भारत इसका एक संस्थापक सदस्य है।
9. आगे का रास्ता : समावेशी विकास (Inclusive Growth)
वैश्वीकरण की चुनौतियों से निपटने के लिए समावेशी विकास आवश्यक है। इसका अर्थ है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेषकर गरीबों और पिछड़े लोगों तक पहुँचना चाहिए।
सरकार को ऐसी नीतियाँ बनानी चाहिए जिनसे छोटे उद्योगों और कृषि क्षेत्र को भी वैश्वीकरण का लाभ मिल सके।
📌 परीक्षा सारांश
• वैश्वीकरण विश्व की विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ने की प्रक्रिया है।
• वैश्वीकरण में वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, प्रौद्योगिकी और लोगों का प्रवाह शामिल है।
• बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वैश्वीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
• बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ एक से अधिक देशों में उत्पादन करती हैं।
• आउटसोर्सिंग में किसी कंपनी के कुछ कार्य दूसरी बाहरी कंपनी से करवाए जाते हैं।
• भारत आउटसोर्सिंग का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
• वैश्वीकरण का एक प्रमुख अंग व्यापारिक बाधाओं को कम करना है।
• विदेशी निवेश का अर्थ किसी विदेशी कंपनी द्वारा दूसरे देश में पूँजी लगाना है।
• 1991 में भारत ने नई आर्थिक नीति अपनाई।
• LPG का अर्थ Liberalisation, Privatisation और Globalisation है।
• उदारीकरण का अर्थ व्यापार और उद्योग पर लगे अनावश्यक प्रतिबंधों को कम करना है।
• निजीकरण का अर्थ सरकारी कंपनियों को निजी हाथों में देना या सरकारी हिस्सेदारी कम करना है।
• वैश्वीकरण से भारत में विदेशी निवेश और नई तकनीक को बढ़ावा मिला।
• वैश्वीकरण से प्रतिस्पर्धा और उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार हुआ।
• वैश्वीकरण से IT, कॉल सेंटर और सेवा क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़े।
• वैश्वीकरण से कुटीर और लघु उद्योगों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ा।
• वैश्वीकरण का कृषि क्षेत्र पर भी प्रभाव पड़ा।
• वैश्वीकरण ने आम आदमी के लिए वस्तुओं के अधिक विकल्प उपलब्ध कराए।
• WTO की स्थापना 1995 में हुई।
• भारत WTO का संस्थापक सदस्य है।
• समावेशी विकास का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाना है।
🎯 प्रश्नावली — सभी प्रश्नोत्तर
एक समय में केवल एक उत्तर खुलेगा। उत्तर छिपाने के लिए उसी प्रश्न पर दोबारा क्लिक करें।
कुल 20 प्रश्न-ब्लॉक
I. अति लघु उत्तरीय प्रश्न
II. लघु उत्तरीय प्रश्न
III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
📋 परियोजना कार्य (Project Work)
अपने विद्यालय के समीप के किसी गाँव या मुहल्ले के निम्न मध्यम वर्ग के दस लोगों से इन बिंदुओं पर उनकी राय लें और बताएँ कि वैश्वीकरण से उन्हें कितना और कैसे लाभ हुआ है?
(क) विगत वर्षों में उनके द्वारा उपयोग की गई वस्तुओं की संख्या में वृद्धि हुई है अथवा नहीं?
(ख) यदि उनके द्वारा उपयोग की वस्तुओं में वृद्धि हुई है तो क्या— (i) वे वस्तुएँ स्थानीय बाजार की निर्मित हैं या बड़ी कंपनियों द्वारा; (ii) उनके उपयोग की सामग्री में कितनी बहुराष्ट्रीय कंपनी का उत्पाद है; (iii) वैश्वीकरण को सरल शब्दों में बताकर उनसे पूछें कि उन्हें इससे कितना लाभ हुआ।
इन प्रश्नावली के आधार पर दस व्यक्तियों में यह बताएँ कि वैश्वीकरण का आम लोगों पर कैसा प्रभाव पड़ा है— अच्छा अथवा बुरा।
🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन
वैश्वीकरण विश्व की अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने की प्रक्रिया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ, विदेशी निवेश, व्यापार, तकनीक और सूचना प्रवाह इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भारत ने 1991 में उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण से जुड़े आर्थिक सुधार अपनाए। वैश्वीकरण से निवेश, तकनीक, प्रतिस्पर्धा और रोजगार के अवसर बढ़े, लेकिन छोटे उद्योगों, कृषि और कुछ श्रमिकों के सामने चुनौतियाँ भी आईं। WTO और समावेशी विकास इस अध्याय के महत्वपूर्ण विषय हैं।
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