Economics Chapter 2: State and National Income | Bihar Board Class 10 Notes
💰 अध्याय 2 : राज्य एवं राष्ट्र की आय
📖 अध्याय का परिचय
इस अध्याय में आय, राष्ट्रीय आय, GDP, GNP, NNP, प्रति-व्यक्ति आय, भारत में राष्ट्रीय आय की गणना, उसकी कठिनाइयाँ, गरीबी का कुचक्र तथा राज्य की आय और समावेशी विकास का अध्ययन किया गया है।
1. आय का परिचय
जब कोई व्यक्ति किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक कार्य करता है और उस कार्य के बदले में उसे जो पारिश्रमिक (पैसा) मिलता है, वह उस व्यक्ति की आय (Income) कहलाती है। आय किसी देश या राज्य के आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक होती है। जिस देश की आय जितनी अधिक होती है, उसे उतना ही विकसित माना जाता है।
उदाहरण: एक शिक्षक स्कूल में पढ़ाकर, एक मजदूर फैक्ट्री में काम करके और एक किसान खेत में अनाज उगाकर आय प्राप्त करता है।
2. राष्ट्रीय आय (National Income)
राष्ट्रीय आय का मतलब किसी देश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से है। सरल शब्दों में, यह एक देश की कुल कमाई होती है।
परिभाषा
अर्थशास्त्री मार्शल के अनुसार, किसी देश के श्रम एवं पूँजी का उसके प्राकृतिक साधनों पर प्रयोग करने से प्रतिवर्ष वस्तुओं और सेवाओं का जो कुल उत्पादन होता है, उसे राष्ट्रीय आय कहते हैं।
राष्ट्रीय आय से संबंधित प्रमुख अवधारणाएँ
① सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product - GDP) — देश की सीमाओं के अंदर एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य।
② सकल राष्ट्रीय उत्पाद (Gross National Product - GNP) — देश के नागरिकों द्वारा एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का कुल मौद्रिक मूल्य, चाहे वे देश के अंदर उत्पादन कर रहे हों या विदेश में।
③ शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (Net National Product - NNP) — GNP में से उत्पादन प्रक्रिया के दौरान हुई टूट-फूट या मशीनों की घिसावट अर्थात मूल्यह्रास को घटाने पर NNP प्राप्त होता है। इसे वास्तव में राष्ट्रीय आय कहा जाता है।
3. प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income - PCI)
जब किसी देश की कुल राष्ट्रीय आय को उस देश की कुल जनसंख्या से भाग दिया जाता है, तो प्राप्त राशि को प्रति व्यक्ति आय कहते हैं। यह किसी देश के लोगों की औसत आय को दर्शाती है।
सूत्र: प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय / देश की कुल जनसंख्या
महत्व: प्रति व्यक्ति आय किसी देश के लोगों के जीवन-स्तर को मापने का एक महत्वपूर्ण पैमाना है। जिन देशों की प्रति व्यक्ति आय अधिक होती है, वे विकसित माने जाते हैं।
उदाहरण: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों की प्रति व्यक्ति आय भारत की तुलना में बहुत अधिक है।
4. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना
इतिहास
भारत में सबसे पहले राष्ट्रीय आय का अनुमान 1868 में दादाभाई नौरोजी ने लगाया था। उन्होंने अपनी पुस्तक "Poverty and Un-British Rule in India" में भारत की प्रति व्यक्ति आय 20 रुपये बताई थी।
वर्तमान संस्था
स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने 1954 में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (Central Statistical Organisation - CSO) की स्थापना की। यही संस्था देश में राष्ट्रीय आय से संबंधित आँकड़े जारी करने के लिए जिम्मेदार है।
राष्ट्रीय आय की गणना में आने वाली कठिनाइयाँ
① आँकड़ों को एकत्र करने में कठिनाई — पूरे देश से सही और विश्वसनीय आँकड़े इकट्ठा करना मुश्किल है।
② दोहरी गणना की संभावना — कई बार एक ही वस्तु या सेवा का मूल्य एक से अधिक बार गिन लिया जाता है। उदाहरण के लिए कपास और उससे बने कपड़े का मूल्य अलग-अलग गिनने पर दोहरी गणना हो सकती है।
③ गैर-मौद्रिक लेन-देन — ग्रामीण क्षेत्रों में कई लेन-देन वस्तु विनिमय के माध्यम से होते हैं, जिनका मौद्रिक मूल्य निकालना कठिन होता है।
5. गरीबी का कुचक्र (Vicious Circle of Poverty)
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रैगनर नर्क्स के अनुसार, "एक देश गरीब है क्योंकि वह गरीब है।" इसका अर्थ है कि गरीबी ही गरीबी का कारण और परिणाम दोनों है।
कम आय होने के कारण लोग कम बचत कर पाते हैं। कम बचत के कारण पूँजी निर्माण और निवेश कम होता है। कम निवेश के कारण उत्पादन और रोजगार कम होता है। इससे आय फिर से कम हो जाती है। इस प्रकार यह चक्र चलता रहता है और देश गरीबी के जाल में फँसा रहता है।
6. राज्य की आय और समावेशी विकास
जिस प्रकार राष्ट्र की आय होती है, उसी प्रकार प्रत्येक राज्य की अपनी आय होती है। भारत में बिहार, उड़ीसा और मध्य प्रदेश जैसे राज्य प्रति व्यक्ति आय के मामले में काफी पीछे हैं।
समावेशी विकास (Inclusive Growth)
समावेशी विकास का अर्थ है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचना चाहिए, न कि केवल कुछ लोगों तक सीमित रहना चाहिए। जब विकास समावेशी होता है, तभी गरीबी और असमानता को कम किया जा सकता है।
उदाहरण: सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएँ, जैसे शिक्षा का अधिकार और मनरेगा, समावेशी विकास का हिस्सा हैं।
📌 परीक्षा सारांश
1. आय वह पारिश्रमिक है जो व्यक्ति को शारीरिक या मानसिक कार्य के बदले मिलता है।
2. राष्ट्रीय आय किसी देश में एक वर्ष के दौरान उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से संबंधित है।
3. GDP देश की सीमाओं के अंदर उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को दर्शाता है।
4. GNP देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से संबंधित है।
5. NNP में GNP से मूल्यह्रास घटाया जाता है। इस अध्याय में NNP को राष्ट्रीय आय के रूप में समझाया गया है।
6. प्रति-व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ कुल जनसंख्या। यह लोगों की औसत आय को बताती है।
7. भारत में राष्ट्रीय आय का पहला अनुमान 1868 में दादाभाई नौरोजी ने लगाया था।
8. 1954 में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) की स्थापना हुई थी।
9. राष्ट्रीय आय की गणना में सही आँकड़े जुटाना, दोहरी गणना से बचना और गैर-मौद्रिक लेन-देन का मूल्य निर्धारित करना प्रमुख कठिनाइयाँ हैं।
10. उत्पादन, आय और व्यय एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक चक्रीय समूह बनाते हैं।
11. गरीबी का कुचक्र कम आय → कम बचत → कम निवेश → कम उत्पादन एवं रोजगार → कम आय के रूप में समझा जाता है।
12. समावेशी विकास का अर्थ है कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचे।
13. राष्ट्रीय आय बढ़ने पर प्रति-व्यक्ति आय बढ़ सकती है, लेकिन यह जनसंख्या की वृद्धि पर भी निर्भर करती है।
14. बिहार की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र का योगदान महत्वपूर्ण है और प्राथमिक क्षेत्र में कृषि प्रमुख है।
15. प्रमुख संक्षिप्त रूप: GDP—Gross Domestic Product, GNP—Gross National Product, NNP—Net National Product, PCI—Per Capita Income, NI—National Income, NSSO—National Sample Survey Organisation, CSO—Central Statistical Organisation.
🎯 प्रश्नावली — सभी प्रश्नोत्तर
एक समय में केवल एक उत्तर खुलेगा। उत्तर छिपाने के लिए उसी प्रश्न पर दोबारा क्लिक करें।
कुल 36 प्रश्न-ब्लॉक
📋 परियोजना कार्य (Project Work)
परियोजना 1
छात्र चार्ट के माध्यम से अपने परिवार के आय के स्रोतों का वर्णन करें।
परियोजना 2
कक्षा के छात्रों को दो समूहों में विभाजित करते हुए राष्ट्रीय आय एवं प्रति-व्यक्ति आय के बारे में अपनी कक्षा में एक वाद-विवाद आयोजित करें।
परियोजना 3
छात्र अपने परिवार की कुल मासिक आय एवं उस आय पर आश्रितों (परिवार के कुल सदस्यों) पर होने वाले खर्चों की एक सारणी बनाएँ।
🔄 एक नजर में अध्याय का पुनरावर्तन
आय व्यक्ति को कार्य के बदले मिलने वाला पारिश्रमिक है। राष्ट्रीय आय देश की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण माप है। GDP, GNP और NNP राष्ट्रीय आय से संबंधित प्रमुख अवधारणाएँ हैं। प्रति-व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय को जनसंख्या से भाग देकर प्राप्त होती है। भारत में राष्ट्रीय आय के प्रारंभिक अनुमान का संबंध दादाभाई नौरोजी से है। राष्ट्रीय आय की गणना में आँकड़ों की कमी, दोहरी गणना और गैर-मौद्रिक लेन-देन जैसी कठिनाइयाँ आती हैं। गरीबी का कुचक्र कम आय, कम बचत, कम निवेश और कम उत्पादन के क्रम से समझा जाता है। समावेशी विकास का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाना है।
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