कक्षा 10
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Economics Chapter 5: Employment and Services | Bihar Board Class 10 Notes

Bihar Board Class 10 Economics Chapter 5: रोजगार एवं सेवाएँ
📘 Bihar Board | Class 10 | Economics (अर्थशास्त्र)

💼 अध्याय 5 : रोजगार एवं सेवाएँ

Employment and Services — सरल Self Study Notes, महत्वपूर्ण तथ्य और परीक्षा अभ्यास
💼 रोजगार🏢 सेवा क्षेत्र💻 IT🌍 वैश्वीकरण
📚 इस अध्याय में सीधे अपने Topic पर जाएँ

📖 अध्याय का परिचय

इस अध्याय में रोजगार और सेवाओं की अवधारणा, अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्र, सेवा क्षेत्र का महत्व, सरकारी एवं गैर-सरकारी सेवाएँ, आउटसोर्सिंग, आधारिक संरचना, NREGA/MGNREGA तथा वैश्वीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी के प्रभाव का अध्ययन किया गया है।

💡 अध्ययन तरीका: पहले Notes पढ़ें → महत्वपूर्ण तथ्य दोहराएँ → फिर नीचे प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें।

1. रोजगार और सेवाओं का परिचय

रोजगार (Employment)

जब कोई व्यक्ति किसी काम को करने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से मेहनत करता है और उस काम के बदले में उसे आय प्राप्त होती है, तो उसे रोजगार कहते हैं।

उदाहरण: किसान खेत में काम करके, शिक्षक स्कूल में पढ़ाकर और डॉक्टर मरीज का इलाज करके रोजगार प्राप्त करते हैं।

सेवाएँ (Services)

सेवाएँ वे गतिविधियाँ हैं जो सीधे तौर पर किसी वस्तु का उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करती हैं।

उदाहरण: बैंकिंग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सेवाओं के उदाहरण हैं।

रोजगार और सेवाएँ एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई हैं। जब देश में सेवाओं का विस्तार होता है, तो रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।

2. अर्थव्यवस्था की संरचना : तीन प्रमुख क्षेत्र

① प्राथमिक क्षेत्र (Primary Sector)

इसे कृषि क्षेत्र भी कहा जाता है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का सीधे उपयोग किया जाता है।

उदाहरण: खेती करना, पशुपालन, मछली पकड़ना और खानों से खनिज निकालना।

भारत की बड़ी आबादी प्राथमिक क्षेत्र में कार्य करती है।

② द्वितीयक क्षेत्र (Secondary Sector)

इसे औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है। इसमें प्राथमिक क्षेत्र से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करके नई वस्तुओं का निर्माण किया जाता है।

उदाहरण: कपास से कपड़ा बनाना, गन्ने से चीनी बनाना और लौह अयस्क से स्टील बनाना।

③ तृतीयक क्षेत्र (Tertiary Sector)

इसे सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है। यह प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों के विकास में सहायता करता है। आज के समय में यह भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ने वाला क्षेत्र है।

उदाहरण: बैंक, अस्पताल, स्कूल, रेलवे और टेलीफोन सेवाएँ।

3. सेवा क्षेत्र का महत्व और प्रकार

सेवा क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। यह देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में महत्वपूर्ण योगदान देता है और बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा करता है।

① सरकारी सेवाएँ (Public/Government Services)

जब सरकार नागरिकों को विभिन्न सुविधाएँ प्रदान करने के लिए लोगों को काम पर रखती है और उन्हें वेतन देती है, तो इसे सरकारी सेवा कहते हैं।

उदाहरण: सैन्य सेवा, प्रशासनिक सेवा, शिक्षा सेवा, स्वास्थ्य सेवा और सरकारी बैंकिंग सेवा।

② गैर-सरकारी सेवाएँ (Private/Non-Government Services)

जब व्यक्ति या कंपनियाँ निजी लाभ के लिए लोगों को सेवाएँ प्रदान करती हैं, तो उन्हें गैर-सरकारी सेवाएँ कहते हैं।

उदाहरण: निजी बैंकिंग सेवाएँ, दूरसंचार सेवाएँ, निजी बसें और टैक्सी तथा होटल और रेस्टोरेंट सेवाएँ।

4. रोजगार सृजन में सेवाओं की भूमिका

सेवा क्षेत्र रोजगार पैदा करने का एक बड़ा स्रोत बन गया है। विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और संचार के विकास ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन किया है।

आउटसोर्सिंग (Outsourcing)

जब कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी अपने कुछ कार्य, जैसे ग्राहक सेवा या रिकॉर्ड-कीपिंग, किसी दूसरी कंपनी से करवाती है, तो इसे आउटसोर्सिंग कहते हैं।

भारत बड़ी संख्या में अंग्रेजी बोलने वाले कुशल युवाओं के कारण आउटसोर्सिंग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

उदाहरण: कॉल सेंटर, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन और अकाउंटिंग सेवाएँ।

5. आधारिक संरचना (Infrastructure)

आधारिक संरचना का अर्थ उन सभी सुविधाओं और सेवाओं से है जो देश के आर्थिक विकास और सेवा क्षेत्र के विस्तार की नींव होती हैं।

इसके अंतर्गत शामिल हैं: बिजली, सड़कें और रेलवे, टेलीफोन और इंटरनेट, बैंकिंग व्यवस्था, स्कूल और कॉलेज तथा अस्पताल।

महत्व: जिस राज्य या देश की आधारिक संरचना जितनी अच्छी होती है, वहाँ निवेश और विकास की संभावना उतनी ही अधिक होती है।

6. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (NREGA)

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 को अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नाम से जाना जाता है।

उद्देश्य

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी देना है।

कार्य

इसके तहत गाँवों में तालाब खोदने, सड़क बनाने और वृक्षारोपण जैसे कार्य करवाए जाते हैं, ताकि लोगों को उनके गाँव के पास ही रोजगार मिल सके।

यह दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार योजनाओं में से एक है।

7. वैश्वीकरण और सूचना प्रौद्योगिकी का प्रभाव

सूचना प्रौद्योगिकी (IT)

कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर और इंटरनेट के विकास ने बैंकिंग, संचार और व्यापार को बहुत आसान बना दिया है। भारत सॉफ्टवेयर विकास और IT सेवाओं का एक बड़ा निर्यातक है।

वैश्वीकरण

वैश्वीकरण के कारण भारतीय कंपनियाँ दुनिया भर में अपनी सेवाएँ दे रही हैं और विदेशी कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

भारत का भविष्य सेवा क्षेत्र के विकास पर काफी हद तक निर्भर करता है। सेवा क्षेत्र के विस्तार से देश की आय बढ़ने के साथ-साथ लाखों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

📌 परीक्षा सारांश

• रोजगार में व्यक्ति काम के बदले आय प्राप्त करता है।

• सेवाएँ लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने वाली गतिविधियाँ हैं।

• अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्र प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक हैं।

• प्राथमिक क्षेत्र को कृषि क्षेत्र भी कहा जाता है।

• द्वितीयक क्षेत्र को औद्योगिक क्षेत्र भी कहा जाता है।

• तृतीयक क्षेत्र को सेवा क्षेत्र भी कहा जाता है।

• सेवा क्षेत्र प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों के विकास में सहायता करता है।

• सरकारी सेवाएँ सरकार द्वारा नागरिकों को उपलब्ध कराई जाती हैं।

• गैर-सरकारी सेवाएँ निजी व्यक्ति या कंपनियाँ प्रदान करती हैं।

• आउटसोर्सिंग सेवा क्षेत्र में रोजगार का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

• भारत आउटसोर्सिंग का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

• आधारिक संरचना में बिजली, सड़क, रेलवे, संचार, बैंकिंग, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएँ शामिल हैं।

• NREGA की शुरुआत 2005 में हुई थी।

• NREGA को अब MGNREGA के नाम से जाना जाता है।

• MGNREGA के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है।

• वैश्वीकरण और IT के विकास से सेवा क्षेत्र का विस्तार हुआ है।

• IT ने बैंकिंग, संचार और व्यापार को अधिक आसान बनाया है।

• वैश्वीकरण से भारतीय कंपनियों को विश्व स्तर पर सेवाएँ देने और विदेशी निवेश के अवसर मिले हैं।

• सेवा क्षेत्र के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।

🎯 प्रश्नावली — सभी प्रश्नोत्तर

💡 पहले स्वयं उत्तर सोचें — फिर प्रश्न पर क्लिक करके उत्तर देखें।
एक समय में केवल एक उत्तर खुलेगा। उत्तर छिपाने के लिए उसी प्रश्न पर दोबारा क्लिक करें।
कुल 19 प्रश्न-ब्लॉक

I. अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1आर्थिक विकास का तीसरा क्षेत्र क्या है?
उत्तर: (घ) सेवा क्षेत्र
2मानव पूँजी के प्रमुख घटक कितने हैं?
उत्तर: (ग) 5
3कौन BIMARU राज्य नहीं है?
उत्तर: (ग) कर्नाटक
4कौन-सी सेवा गैर सरकारी है?
उत्तर: (ग) मॉल सेवा
5ऊर्जा के मुख्य स्रोत क्या हैं?
उत्तर: (घ) इनमें से सभी

II. लघु उत्तरीय प्रश्न

6Out Sourcing किसे कहते हैं?
उत्तर: जब कोई कंपनी अपने कुछ कार्य, जैसे ग्राहक सेवा या रिकॉर्ड-कीपिंग, किसी दूसरी कंपनी से करवाती है, तो इसे आउटसोर्सिंग कहते हैं।
7सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) से जुड़े पाँच सेवा क्षेत्र को बतलाएँ।
उत्तर: सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े सेवा क्षेत्रों के उदाहरण हैं— बैंकिंग, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा व्यापार/व्यावसायिक सेवाएँ।
8सरकारी सेवा किसे कहते हैं?
उत्तर: जब सरकार नागरिकों को विभिन्न सुविधाएँ प्रदान करने के लिए लोगों को काम पर रखती है और उन्हें वेतन देती है, तो उसे सरकारी सेवा कहते हैं।
9गैर सरकारी सेवा किसे कहते हैं?
उत्तर: जब निजी व्यक्ति या कंपनियाँ निजी लाभ के लिए लोगों को सेवाएँ प्रदान करती हैं, तो उन्हें गैर-सरकारी सेवा कहते हैं।
10आधारभूत संरचना किसे कहते हैं?
उत्तर: वे सभी सुविधाएँ और सेवाएँ जो देश के आर्थिक विकास तथा सेवा क्षेत्र के विस्तार की नींव होती हैं, आधारिक या आधारभूत संरचना कहलाती हैं। जैसे— बिजली, सड़क, रेलवे, संचार, बैंकिंग, स्कूल और अस्पताल।
11‘रोजगार’ और ‘सेवा’ में क्या संबंध है?
उत्तर: सेवा क्षेत्र में बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार आदि अनेक गतिविधियाँ होती हैं। इन सेवाओं के विस्तार से रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं। इसलिए रोजगार और सेवा क्षेत्र का गहरा संबंध है।
12आर्थिक संरचनाओं का क्या महत्व है?
उत्तर: आधारिक आर्थिक संरचनाएँ विकास की नींव होती हैं। अच्छी सड़क, बिजली, रेलवे, संचार, बैंकिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ निवेश तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देती हैं।
13मंदी का असर भारत में क्या पड़ा?
उत्तर: आर्थिक मंदी से आर्थिक गतिविधियों और माँग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे उद्योग और सेवाओं में रोजगार तथा आय के अवसर प्रभावित होते हैं।
14वैश्वीकरण का प्रभाव सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा?
उत्तर: वैश्वीकरण के कारण भारतीय कंपनियों को विश्व स्तर पर सेवाएँ देने के अवसर मिले और विदेशी कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ा। इससे सेवा क्षेत्र के विस्तार और रोजगार के नए अवसरों में वृद्धि हुई।

III. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

15सेवा क्षेत्र पर एक संक्षिप्त लेख लिखें।
उत्तर: सेवा क्षेत्र अर्थव्यवस्था का तृतीयक क्षेत्र है। इसमें बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार आदि सेवाएँ शामिल हैं। यह प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रों के विकास में सहायता करता है तथा GDP और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देता है। IT और वैश्वीकरण के विकास से सेवा क्षेत्र का महत्व और बढ़ा है।
16विश्व के लिए भारत सेवा प्रदाता के रूप में किस तरह जाना जाता है? उदाहरण सहित लिखें।
उत्तर: भारत बड़ी संख्या में अंग्रेजी बोलने वाले कुशल युवाओं और IT विशेषज्ञता के कारण विश्व के लिए महत्वपूर्ण सेवा प्रदाता के रूप में विकसित हुआ है। कॉल सेंटर, मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन, अकाउंटिंग, सॉफ्टवेयर विकास और IT सेवाएँ इसके उदाहरण हैं।
17सेवा क्षेत्र में सरकारी प्रयास के रूप में क्या किये गए हैं, वर्णन करें।
उत्तर: सरकार नागरिकों को शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, सैन्य और बैंकिंग जैसी सेवाएँ उपलब्ध कराती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए NREGA/MGNREGA जैसी योजना भी महत्वपूर्ण सरकारी प्रयास है, जिसके अंतर्गत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है।
18गैर सरकारी संस्था किस प्रकार सेवा क्षेत्र के विकास को सहयोग करता है, उदाहरण देकर लिखें।
उत्तर: गैर-सरकारी संस्थाएँ और निजी कंपनियाँ निजी निवेश के माध्यम से बैंकिंग, दूरसंचार, परिवहन, होटल, रेस्टोरेंट तथा अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। इससे सेवाओं का विस्तार, प्रतिस्पर्धा और रोजगार के नए अवसर बढ़ सकते हैं।
19वर्तमान आर्थिक मंदी का प्रभाव भारत के सेवा क्षेत्र पर क्या पड़ा? लिखें।
उत्तर: आर्थिक मंदी के समय माँग और आर्थिक गतिविधियों में कमी आने से सेवा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में व्यापार, निवेश, आय और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं। सेवा क्षेत्र की IT, परिवहन, पर्यटन तथा अन्य गतिविधियाँ आर्थिक परिस्थितियों में बदलाव से प्रभावित होती हैं।

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